सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मधुपुर में फिर बवाल, अबकी बार जच्चा की गई जान, जांच शुरू

जयनाथ मौर्या (संवाददाता)

मधुपुर । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मधुपुर में एक बार फिर बड़ी लापरवाही सामने आई है। आज लोहरा गांव निवासी एक जच्चा की मौत के बाद आज परिजनों ने अस्पताल आकर जमकर हंगामा किया । बवाल बढ़ा तो ड्यूटी पर मौजूद सीएचसी प्रभारी एवं जच्चा बच्चा केंद्र के आरोपी स्टॉफ अपने-अपने फोन स्विच ऑफ कर संपर्क से बाहर हो गए ।

लोहरा गांव निवासी गोविंद के अनुसार उसने अपनी पत्नी पुष्पा 22 वर्ष को डिलीवरी के लिए 25 फरवरी को सुबह मधुपुर सीएचसी लेकर आया था । जहां मौजूद कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर सीमा देवी ने कुछ घंटे बाद प्रसव होने की बात कह कर उसे अपने यहां भर्ती कर लिया। दोपहर में उससे इंजेक्शन के नाम पर ₹350 लिया गया। इंजेक्शन देने के कुछ देर बाद पुष्पा ने स्वस्थ बालक का जन्म दिया लेकिन कुछ देर बाद जच्चा को ब्लड आने लगा। जिस पर कुछ इलाज कर उसका खून जांच कराया गया। जांच में हेमोग्लोबिन की मात्रा कम पाए जाने के बाद भी उसे कुछ ही घंटे बाद घर जाने के लिए कह कर छोड़ दिया गया और बताया गया कि आगे कोई परेशानी नहीं होगी। 26 फरवरी को सुबह पुष्पा की तबीयत घर पर काफी खराब हो गई और वह लगभग बेहोशी की हालत में जाने लगी। यह देख गोविंद ने कॉल कर स्थिति की जानकारी डिलीवरी कराने वाली सीमा देवी को दिया। जहां से उनके द्वारा एंबुलेंस भेज कर सीएचसी मरीज को मंगवाया गया और स्थिति गंभीर देख जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने पुष्पा को मृत घोषित कर दिया और डेड बॉडी को परिजनों को बगैर किसी जांच के ही हवाले कर दिया। जिसके बाद परिजन शव को ले जाकर दाह संस्कार कर दिए। यह बात जब लोगों को पता चली तो तमाम इलाके के लोगों के साथ ही विश्व हिंदू परिषद मातृशक्ति के जिलाध्यक्ष सुमन सिंह पटेल अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पर पहुंच गई और अन्य लोगों के साथ लापरवाह चिकित्सकों पर कार्यवाही करने की मांग को लेकर मुखर हो गई।

बवाल की सूचना मिलने पर सीएमओ ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी सीएमओ डॉ0 बी0के0 अग्रवाल को मौके पर जांच कर रिपोर्ट देने के लिए भेजा। इस दरमियान सुकृत पुलिस लोगों को नियंत्रित करने में लगी रही।

इस पूरे प्रकरण पर डॉ0 बी0के0 अग्रवाल का कहना है की प्रथम दृष्टया सीमा देवी एवं सीएचसी प्रभारी की लापरवाही सामने आ रही है। किसी भी दशा में जच्चा को 24 घंटे के अंदर घर नहीं भेजा जाना चाहिए था और गंभीर अवस्था में उसे जिला अस्पताल भेजने के बजाय घर भेज दिया गया। जिला अस्पताल पर दूसरे दिन जाने के बाद किन परिस्थितियों मृतिका को बिना पोस्टमार्टम के शव परिजनों को दे दिया गया इसकी भी जांच की जाएगी। डॉ0 बी0के0 अग्रवाल ने बताया कि सीएचओ को कार्यमुक्त करने के लिए सीएमओ को अपनी रिपोर्ट प्रेषित कर दिया हूँ।



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