उम्मीद के कागज पर खींच रहे आरक्षण का खाका

मनोहर कुमार

* पंचायतों के आरक्षण को लेकर आकलन का जोर

* रोटेशन प्रणाली पर बहस मशविरा जारी।

* गांवों में राजनीति के बदल रहे रंग

चन्दौली। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के साथ नियमों वी प्रक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। मार्च में चुनाव की तिथियां घोषित होने की सम्भावना जताई जा रही है। पंचायतों के आरक्षण को लेकर ऊहापोह का दौर शुरू है।सरकारी स्तर पर तैयारी चल रही है। इधर गांवों में उम्मीद के कागज पर दावेदार आरक्षण के होने न होने का खाका खींच रहे हैं। चुनाव लडने वाले इस पर अपना अंकगणित लगा कर लोगों को समझा भी रहे हैं।कौन सा सीट आरक्षित होगी व किसके लिए।इसके लिए पूर्व के रोटेशन को पड़ा जा रहा है।धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जनपद राजनीति रंग बदलने लगी है।
धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जनपद में राजनीति एक बार फिर लहलहाने लगी है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ताना बाना बना जा रहा है।सरकारी स्तर पर भी चुनाव कराने के प्रक्रिया चल रही है।मार्च में तिथि घोषित होने की सम्भावना है।जनपद का जिला पंचायत अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए घोषित किया गया है।अब जिला पंचायत सदस्य, बी डी सी व ग्राम प्रधान , ग्राम सदस्य के पद का आरक्षण होना है।इस आरक्षण को लेकर दावेदारों में ऊहापोह की स्थिति है।दावेदार उम्मीद के कागज पर आरक्षण का खाका खींच रहे हैं।कौन सी सीट किस आरक्षण के दायरे में आएगी इसका आकलन कर रहे हैं। आरक्षण के कई रूप है।इसका मंथन किया जा रहा है।आबादी पर भी आकलन किया जा रहा है किस क्षेत्र व गांव में किसकी आबादी ज्यादा इस आधार पर आरक्षण का दांव आएगा। पहले से ही अपने लिए निर्धारित कर चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदार आरक्षण के चलते ब्रेक पर है। हालांकि गांव की राजनीति में मिठास की हवा चल रही है।किस का सिक्का चलेगा इस पर भी चर्चा जमकर हो रही है।मौसम के मिजाज की तरह गांव की रजनीति भी सर्द गर्म हो रही है।आरक्षण के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाने पर एक बार फिर राजनीति सरपट दौड़ते नजर आएगी। फिलहाल दावेदार उम्मीद के कागज पर आरक्षण की खाका खींच अपनी चुनावी उम्मीद जिंदा किए है।



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