खेतीबारी – कम लागत में मशरूम की खेती संभव : प्रो0 पंजाब सिंह

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित एवं फार्ड फाउंण्डेशन व आई0सी0ए0आर0-आई0आई0वी0आर0 की ओर से संचालित द्वारा बायोटेक किसान परियोजना के तहत फार्ड फाउंण्डेशन व सोनवैली बायो एनर्जी एफ0पी0ओ0 के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत गौरही गांव में 30 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से गौरही व बट्ट गाॅव के लगभग कुल 30 महिलाओं ने प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया।

इस दौरान फोर्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष व बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो0 पंजाब सिंह ने बताया कि बहुत कम जमीन पर कम लागत में मशरूम की खेती कर किसान अपने आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक आवश्यकता की आपूर्ति कर सकते है। उन्होंने कहा कि खेती करने के लिए वर्तमान समय में किसानों के पास जमीन दिनोंदिन कम होती जा रही है। कम जमीन वाले किसानों के लिए मशरूम की खेती एक अच्छी विकल्प साबित हो सकता है साथ ही मशरूम लगाने से फसल अवशेष का प्रबंधन भी हो जाता है। इससे पर्यावरण पर हो रहे दुष्परिणाम से भी बचा जा सकता है।

कृषि विज्ञान केन्द्र सुतही की कृषि एक्सपर्ट रश्मि सिंह एवं राष्ट्रीय सब्जी बीज अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक डा0 सुदर्शन मौर्या ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। वहीं प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम का बैंग बनाना एवं उसके खेती और उत्पादन पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण में सोनवैली बायोएनर्जी एफ0पी0ओ0 के निदेशक सत्यप्रकाश पाण्डेय ने मशरूम के मुल्य संवर्धन कर उसके मार्केटींग के बारे में प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया।

इस मौके पर फार्ड फाउंण्डेशन के यंग प्रोफेशनल मधुकर पटेल, आदर्श, कमलेश के साथ प्रगतिशील किसान और कृषि विभाग के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।



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