न खेती, न रोजगार तो पुनर्वास कॉलोनी में कैसे गुजारा करेंगे कनहर विस्थापित?

रमेश यादव (संवाददाता)

लगभग 6 साल में भी अमवार पुनर्वास कॉलोनी में अव्यवस्थाओं का आलम

● कहीं सड़कें अधूरी तो कहीं गिरे पड़े है बिजली के तार व पोल

कनहर विस्थापितों की मांग, खेती-बाड़ी के लिए मिले जमीन या रोजगार

दुद्धी । बहुप्रतीक्षित कनहर सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य लगभग अंतिम रूप में चल रहा है लेकिन अभी कनहर परियोजना का पुर्नवास कॉलोनी अमवार में अव्यवस्थाओं का हवाला देकर नाम मात्र के ही विस्थापित बस सकें है। लगभग 37 सालों से लंबित परियोजना को काफी मशक्कत के बाद सपा सरकार में दिसम्बर 2014 में शुरू की गई ।शुरुआत में काफी विरोध के बाद भी परियोजना निर्माण में तेजी देखी गई लेकिन विस्थापितों की समस्याओं पर कोई ठोस पहल आज तक नही किया गया।पुनर्वास पैकेज के बाद पुनर्वास कॉलोनी में विस्थापितों के नाम से घर बनाने के लिए भूमि तो एलाट कर दी गई लेकिन सुविधाओं के नाम पुनर्वास कॉलोनी में सुविधाओं का सिर्फ खाका ही खिंचा जा सका।इसलिए पुनर्वास कॉलोनी में अभी तक न पूर्ण रूप से सड़क बन सके और नही पूर्ण रूप से विद्युतीकरण ही किया गया है और जहाँ जहाँ किया भी गया है वहाँ कई जगहों पर पोल गिर चुके हैं तो कहीं जमीन पर तार लटक रहे हैं।जबकि पानी के नाम पर हैंडपंप लगाए गए हैं।

कनहर विस्थापित गांव सुंदरी के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि फणीश्वर जायसवाल, कोरची के ग्राम गम्भीरा प्रसाद तथा भिसुर के ग्राम प्रधान संतोष ने कहा कि शासन के द्वारा कनहर विस्थापितों को पुनर्वास पैकेज तो दिया जा रहा है लेकिन आज तक उनकी रोजगार या खेती बाड़ी के लिए जमीन की व्यवस्था नही की गई हैं इसलिए कनहर विस्थापित पुनर्वास कॉलोनी में बसने में विस्थापित रुचि नहीं ले रहे हैं क्योंकि उन्हें यह डर सता रहा है कि हम पुनर्वास पैकेज के पैसे से पुनर्वास कॉलोनी में अपने रहने के लिए आवास तो बना लेंगे लेकिन रोजगार कहा से लाएंगे और हमारे पास रोजगार नही होगा तो हम सब पुनर्वास कॉलोनी में गुजारा कैसे करेंगे। चूंकि कनहर विस्थापितों के पास खेती के अलावा रोजगार के कोई साधन नहीं है इसलिए कनहर विस्थापितों के सामने सबसे बड़ी संकट रोजगार की है। कनहर विस्थापितों का कहना है कि हमें खुशी है कि शासन की पहल पर इस परियोजना के निर्माण से 108 गांव लाभान्वित होंगे और हम सब 11 गांव के लोग विस्थापित होंगे।परियोजना पूर्ण होने के बाद हमलोगों की जमीन तो डूब जाएगी और हमलोगों की खेती छीन जाएगी और रोजगार के कोई साधन है नही तो आखिर हमलोग रोजगार के लिए कहा जाएंगे।यह हमलोगों के सामने भविष्य में विकट समस्या खड़ा होने वाली है।

पुनर्वास पैकेज का पैसा खर्च कर पैसा नहीं होने का रोना रोने लगे विस्थापित, मकान गिराने के शपथपत्र देने के बाद भी नहीं गिरा घर

कनहर सिंचाई परियोजना अमवार के विस्थापित मिलने वाले पुनर्वास पैकज का पैसा अनावश्यक रूप से खर्च कर अब धीरे धीरे पैसा नहीं होने का रोना रोने लगे हैं जिससे उन्हें पुनर्वास कॉलोनी में बसाना शासन के लिए गम्भीर समस्या खड़ी होती जा रही हैं।हालांकि शासन द्वारा पुनर्वास पैकेज वितरण से पहले मकान गिराने का शपथपत्र लिया गया है तब उन्हें चेक प्रदान किया गया है और तहसील प्रशासन उन्हें समय समय पर नोटिस जारी कर रही हैं लेकिन तहसील प्रशासन द्वारा जारी नोटिस का अभी तक कनहर विस्थापितों पर कोई खास असर नही देखा गया है इसका ताजा उदाहरण पुनर्वास कॉलोनी में बसे लोगों की संख्या देखकर लगाया जा सकता है।

एक ही क़िस्त में 7 लाख 11 हजार रुपये की धनराशि जारी करते ही आई समस्या

जब तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह और उसके बाद संजय कुमार सिंह द्वारा दिसम्बर 2014 को पुनर्वास पैकेज देने की शुरुआत की गई थी तो उस समय कनहर विस्थापितों के बीच बैठक में तय हुआ कि पुनर्वास पैकेज की धनराशि दो किस्तों में दी जाएगी।जिसमें पहली शर्त यह थी कि पहले विस्थापित अपना घर गिराकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे तब उन्हें पहली किस्त के रूप में 2 लाख 11 हजार रुपये का चेक जारी किया जाएगा और पुनर्वास कॉलोनी में मकान निर्माण करने पर दूसरी क़िस्त के रूप में 5 लाख रुपये का चेक जारी किया जाएगा।यह प्रक्रिया शुरुआत में कुछ महीनों तक चला लेकिन जैसे ही इन अधिकारियों का स्थानांतरण हुआ तो दलाल सक्रिय हो गए लेखपालों एवं तहसील प्रशासन से सांठ-गांठ पुनर्वास पैकेज की पूरी धनराशि 7 लाख 11 हजार रुपये एक साथ वितरण कराने लगे जिसके बाद कनहर विस्थापित चेक तो पाते गए लेकिन अपना घर नही छोड़ें जो अब धीरे धीरे एक समस्या बनती जा रही हैं।



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