ओवरलोड चेकिंग में सामने आई प्रशासन की बड़ी चूक, कहाँ गयी ट्रक पता नहीं

आनंद कुमार चौबे/अंशु खत्री (संवाददाता)

सोनभद्र । पहले जिला नक्सल को लेकर बदनाम था तो अब अवैध खनन को लेकर । सरकार चाहे किसी की भी हो अवैध खनन व परिवहन रोक पाना हमेशा से ही टेढ़ी खीर रही है। जिलाधिकारी के 12 घण्टे के प्लान से ही साफ हो गया कि कैसे सोनभद्र में ओवरलोड को लेकर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जो न सिर्फ जिले को नुकसान पहुंचा रहा बल्कि सरकारी राजस्व को भी बड़ी क्षति पहुंचा रहा है। इतना ही नही पहले दिन बिना परमिट ओवरलोड ट्रक पार कराने के चक्कर में 4 लोगों पर मुकदमा तक दर्ज हो गया । लेकिन इसी बवाल में एक बड़ी खामी भी प्रशासन की खुल कर सामने आ गयी । प्रशासन द्वारा दी गयी तहरीर के मुताबिक पहले दिन रात जब ओबरा एसडीएम के नेतृत्व में टीम चेकिंग कर रही थी तो गाड़ी से 4 युवक आये और बिना परमिट ओवरलोड ट्रक को पार कराने के लिए दबाव बनाने लगे लेकिन जब वे सफल नहीं हो सके तो अधिकारी से उलझ गए। जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर रावर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया ।प्रशासन ने अपनी तहरीर में सारे बातों का जिक्र किया मगर जिस ट्रक को पार कराने के चक्कर में यह पूरा बवाल हुआ उस ट्रक का आखिर क्या हुआ इसका कहीं जिक्र नहीं किया । सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन को ओवरलोड बिना परमिट ट्रक की जानकारी थी तो निश्चित तौर पर उस ट्रक का नंबर भी जरूर पता होगा। ऐसे में प्रशासन उस ट्रक को हिरासत में लिए गए युवकों के साथ रावर्ट्सगंज कोतवाली क्यों नहीं भेजा । क्या ट्रक को जानबूझकर छोड़ा गया या फिर कोई और बात है, इसकी चर्चा अब आम होने लगी है ।
इस पूरे मामले पर अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बहरहाल जिलाधिकारी के 12 घण्टे प्लान से ही परिवहन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह है कि एक हफ्ते के इस चेकिंग के बाद व्यवस्था कितनी सुधार पाती है क्योंकि प्रशासन को भी पता है कि मजिस्ट्रेट के भरोसे चेकिंग लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता और विभाग में कुछ ही लोग भरोसे के हैं जो ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं ।



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