ओवरलोड पर नकेल : पहले दिन बिना परमिट ओवरलोड वाहन पार कराने के चक्कर में 4 युवकों पर मामला दर्ज

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

– ओबरा एसडीएम की टीम ने पहले दिन किया 21 गाड़ियों का चालान

– कई ओवरलोड में तो कई बिना परमिट में चालान

– गिरफ्तार चारों युवकों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने का लगा आरोप

– जिलाधिकारी के 12 घण्टे के प्लान का दिखने लगा असर

– 24 घण्टे में से 12 घण्टे की चेकिंग में खुल गयी सभी विभाग की पोल

– पहले भी होती थी रोज चेकिंग, लेकिन नहीं होती थी कार्यवाही

– चेकिंग शुरू होते ही मारकुंडी में दिनभर खड़ी होने वाली ट्रकें गायब

– मारकुंडी में दिखने लगा चौड़ी सड़क

सोनभद्र । ओवरलोड रोकने के लिए जिलाधिकारी द्वारा तैयार किया गया 12 घण्टे के प्लान का असर पहले दिन से ही दिखने लगा हैं । प्लान के मुताबिक रविवार रात 12 से सुबह 6 बजे तक के शिफ्ट में ओबरा एसडीएम प्रकाश चन्द्र अपने दल बल के साथ तैनात थे। एसडीएम ओबरा के अलावा सीओ ओबरा, एआरटीओ प्रवर्तन, खनन सर्वेयर, गुरमा चौकी इंचार्ज व अन्य स्टाफ मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि रात लगभग 12.30 बजे जब टीम टोल प्लाज़ा ओर चेकिंग कर रही थी तभी एक गाड़ी में सवार 4 लोग टोल पर पहुंचकर बिना परमिट ओवरलोड ट्रक पार कराने के लिए दबाव बनाने लगे । सूत्रों की माने तो गाड़ी से लोग टोलप्लाजा का साइड वाला गेट भी हटा दिया ताकि ट्रक वहां से पार हो सके। लेकिन जब प्रशासन ने सख्ती दिखाई तो उनसे उलझ गए । जिसके बाद एसडीएम ओबरा के आदेश पर प्रशासन ने सभी को कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया ।

चूंकि मामला रात का था तो ज्यादा लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाई लेकिन जैसे-जैसे दिन का उजाला बढ़ता गया मामला नगर में फैलने लगा और लोग कोतवाली भी पहुंचने लगे ।
खनन सर्वेयर संतोष पाल ने कोतवाली पहुंचकर चारों लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने समेत मारपीट करने की तहरीर देकर मामला दर्ज कराया।
प्रशासन द्वारा इस पूरे कार्यवाही में चारों व्यक्तियों पर बिना परमिट ओवरलोड ट्रक पार कराने का आरोप तो लगा दिया लेकिन सवाल यह उठता है कि प्रशासन की कार्यवाही में ट्रक पर क्या कार्यवाही हुई इसका जिक्र तहरीर में नहीं किया गया।

बहरहाल एसडीएम ओबरा के नेतृत्व में टीम 6 घण्टे में कुल 21 गाड़ियों पर कार्यवाही की । जिसमें 3 वाहनों को रावर्ट्सगंज कोतवाली में बन्द किया गया तथा 18 वाहनों का चालान किया गया है।

कुल मिलाकर जिलाधिकारी के 12 घण्टे के प्लान के बाद पहले दिन की गई कार्यवाही से यह साफ हो गया कि गाड़ियां न सिर्फ बिना परमिट की चलती हैं कि ओवरलोड भी है ।
ऐसे में यह कहा जा सकता है कि यदि जिलाधिकारी का 12 घण्टे का प्लान न आया होता तो यह कार्यवाही का आंकड़ा भी सामने नहीं आता और यही आरोप हमेशा लगता रहा है कि योगी सरकार में इतनी सख्ती के बाद भी सिंडिकेट काम कर रहा है ।



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