पैगम्बर मोहम्मद साहब और सरकार गौस पाक का मू-ए-मुबारक पहुंचा दुद्धी, अकीदतमंदों ने की जियारत

रमेश यादव (संवाददाता)

दुद्धी। पैगम्बर मोहम्मद साहब और सरकार गौस पाक का मू-ए-मुबारक यानि सर-दाढ़ी का बाल दुद्धी की सरजमीं पर पहुंचने से अकीदतमंदों में खुशी की लहर दौड़ गई। मुम्बई निवासी ईशा बाबा नूरी (खलीफा-ए-मुफ़्ती-ए-आजम रहमतुल्लाह अलैह) ने कादरिया ग्रुप के संस्थापक अल्हाज अल्लामा मौलाना नसीरुद्दीन साहब क़िब्ला को यह नायाब तोहफा दुद्धी क्षेत्र को आफत-बलाओं से महफूज़ रखने व बतौर यादगार दी है। मुंबई से यह मुकद्दस मु-ए-मुबारक शरीफ हवाई जहाज से हज़रत के बड़े साहबजादे व दारुल उलूम अरबी महाविद्यालय के उप संस्थापक मौलाना मसऊद रज़ा साहब द्वारा वाराणसी व वहां से सड़क मार्ग से चोपन तक लाया गया। जुमेरात को दिन में 10 बजे हुजूर नसीरे मिल्लत के नेतृत्व में लगभग 25 चार पहिया वाहनों में सवार सैकड़ों लोगों द्वारा चोपन पहुंचकर उनका इस्तक़बाल किया गया। चोपन निवासी एजाज भाई के दौलतकदे पर दुद्धी कूच करने से पूर्व महफिले मिलाद का एहतमाम किया गया। सरकार की शान में आयोजित इस मजलिस में मुफ़्ती महमूद आलम बरकाती की “उनका मंगता हुँ जो मंगता नही होने देते, मेरे जुर्मों का तमाशा नहीं होने देते” जैसी रूहानी नात पर जहां हजरत की आंखे नम हो गई वहीं अकीदतमंदों द्वारा इस्लामी नारों के बीच नोटों की बरसात कर हौसला अफजाई की गई। तत्पश्चात मु-ए-मुबारक का काफिला चोपन से चलकर 4 बजे शाम को दुद्धी पहुंचा। मख्तब जब्बरिया ईदगाह पर अकीदतमंदों ने नारे तकबीर अल्लाहो अकबर, नारे रिसालत या रसूलुल्लाह, मु-ए-मुबारक जिंदाबाद जैसे नारों व या नबी सलाम अलैका, या हबीब सलाम अलैका, मुस्तफा जाने रहमत पर लाखों सलाम आदि नबी-ए-पाक की बारगाह सलाम पेश करते हुए हजरत के दौलतखाने तक पैदल सफर तय किये। जहां पर पहले से मौजूद मौलाना गुलाम सरवर द्वारा फूलों से सजाकर एक मु-ए-मुबारक का हुजरा व मिलाद शरीफ के लिए बज्म सजाई गई थी। हजरत ने अपने सर पर मु-ए-मुबारक को लेकर हुजरे में रखा। चांदी के कासे में रखे पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब व सरकार गौस पाक के मु-ए-मुबारक शरीफ ( दाढ़ी के बाल शरीफ) की जियारत देर रात तक करवाई गई। मिलाद में ओलमाओं ने तकरीर करते हुए कहा कि दुनियां के सबसे बड़े धर्मों में से एक इस्लाम धर्म के संस्थापक मुहम्मद पैगंबर को नबी व रसूल आदि नामों से भी पहचाना जाता है। उन्होंने कुरआन को आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया था। मुहम्मद साहब ने हमेशा सच बोला और सच का साथ दिया। इनके दुश्मन भी इनको सच्चा कहते थे। पैगम्बर मोहम्मद साहब सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि सारी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए। उनके आने से दुनिया से जिहालत का अंधेरा मिट गया। कुरआन की तिलावत हुई। अंत में दरूदों सलाम का नजराना पेश किया गया और फातिहा हुई। हजरत ने अपने रूहानी दुआख्वानी में दुद्धी क्षेत्र को आफत-बलाओं से महफूज रखने, कॅरोना से हिंदुस्तान को मुक्त करने,
मुल्क के अमन-चैन और तरक्की की दुआएं की गईं। जुमा की नमाज के पूर्व हजरत ने बताया कि यह दुद्धी के लिए बेहद खुशी और मसर्रत की बात है कि पैगंबर मोहम्‍मद साहब के पवित्र बालों की जियारत (दर्शन) की तमन्‍ना रखने वाले अकीदतमंदों को निराश होने की जरूरत नहीं है। मिस्र, तुर्की और जम्‍मू-कश्‍मीर स्थित हजरतबल दरगाह जाने में असमर्थ लोगों को दुद्धी में ही पैगंबर साहब के पवित्र बालों का दर्शन हो जाएगा। बताया कि शुक्रवार की शाम तक व आने वाले सोमवार व जुमेरात को सुबह 10 से शाम 4 बजे तक जियारत कराया जाएगा। इसके अलावा साल के खास मौकों जैसे बारहवीं शरीफ और ग्यारहवीं शरीफ सहित कुछ अन्य त्योहारों पर भी मु-ए-मुबारक की जियारत कराई जाएगी।

काफिले में मौलाना नजीरुल कादरी, कारी उस्मान, मोहम्मद जफरुद्दीन, मोहम्मद मंसूर आलम, कौनेन अली, हाफिज तौहीद, चोपन के ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि उस्मान भाई, दुद्धी जामा मस्जिद के सदर मु.शमीम अंसारी,बभनी के पूर्व ब्लाक प्रमुख कासिम हुसैन, रेनुकूट मस्जिद के पूर्व चैयरमैन हाजी फकीर अली, एड. सैफुल्लाह, पूर्व प्रधान सादिक अली, मदरसे के प्रबंधक हसनैन अंसारी, पूर्व सदर आदिल खान, कलीमुल्लाह खान सहित भारी संख्या में हजरात मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टि से कोतवाली के एसआई इनामुलहक अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के साथ मुस्तैद रहे।



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