NOC निरस्त होने के बाद भी कोरगी बालू साइड पर धड़ल्ले से खनन जारी, आखिर किसके इशारे पर चल रहा खेल ? चर्चाओं का बाजार गर्म

जनपद न्यूज ब्यूरो

● जीरो टॉलरेंस की सरकार की खुली पोल

● अवैध खनन को लेकर क्षेत्र में असन्तोष

● जिला और तहसील स्तर पर गठित कमेटियों पर उठ रहे है सवाल

सोनभद्र । यूँ तो सरकार लगातार जीरो टॉलरेंस की लगातार दावे करती है लेकिन दुद्धी तहसील अंतर्गत कनहर के कोरगी बालू साइड पर अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। पर्यावरण की एनओसी खत्म होने के बाद भी धड़ल्ले से अवैध खनन किये जाने से क्षेत्र में जबरदस्त आक्रोश है। सवाल तो यह भी उठ रहा है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी मौन हैं। लेकिन सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहनी और कांफ्रेंस फ़ॉर ह्यूमन राइट के कार्यकर्ताओं ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने जिला प्रशासन और खनन विभाग के अधिकारियों के कार्य शैली पर गम्भीर सवाल खड़े करते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराते हुए प्रमुख सचिव खनन और प्रमुख सचिव पर्यावरण एवं वन से स्थलीय जांच कराकर न सिर्फ कार्यवाही की मांग की है बल्कि किये अवैध खनन का आंकलन कर जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से नुकसान की भरपाई करने की भी मांग की है।

वाहिनी के क्षेत्रीय संयोजक बेचन राम गोड़, दिनेश व ग्राम वन समिति के अध्यक्ष कमलेश मिश्रा, रामनरायन, अशोक आदि ने कहा है कि कनहर नदी की बीच धारा में जिस तरह पर्यावरणीय नुकसान की अनदेखी कर खनन हो रहा है और वहां से ओवर लोड वाहनों का संचालन बेरोक टोक हो रहा है इससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है यह खेल अधिकारियों के सह पर चल रहा है । लोगों का कहना हैं कि आखिर यूपी सरकार की तेज तर्राक पुलिस क्या कर रही, कैसे ट्रकें कई थाने चौकी व टोल को पार कर मंडी में पहुंच रही है, इसकी जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि खुद के काम के लिए साइकिल से बोरे में ले जाने वाले लोगों पर कार्यवाही हो जाती है लेकिन बड़े लोगों की गलती किसी को नहीं दिखता।

पर्यावरणविद का कहना हैं कि नदी की धारा को मोड़कर तीन मीटर से ज्यादा गहराई तक खनन करना नदी के साथ खिलवाड़ है। लेकिन जिले के अधिकारियों से लेकर तहसील तक किसी को नहीं दिख रहा। आखिर कैसे दिन रात चल रहा इसकी जांच होनी चाहिए और सभी जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

बहरहाल कोरगी बालू साइड को लेकर जिस तरह से जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक चुप्पी साधे हुए हैं, ऐसे में यह जरूर कहा जा सकता है कि यहां योगी राज का जीरो टॉलरेंस का फार्मूला भले न दिखता हो लेकिन सबका साथ और सबका विकास तथा सबका बिश्वास जरूर दिखता नजर आ रहा है।



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