अधिवक्ता दिवस पर याद आए राजेन्द्र बाबू

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । अधिवक्ता दिवस के मौके पर देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद उर्फ राजेन्द्र बाबू को शिद्दत से याद किया गया। उनके बताए मार्गों पर चलने का संकल्प भी लिया गया। इस मौके पर आज उत्तर प्रदेश विधिक सहायता एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने कार्य व दायित्व के प्रति सतर्कता व सजगता बरतते हुए पूर्व राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू के विचारों को आत्मसात करते हुए समाज को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सोनभद्र बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री महेंद्र प्रसाद शुक्ला ने किया।

एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक पवन कुमार सिंह ने कहा कि “डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद एक कुशल अधिवक्ता थे और भारतीय संविधानसभा के अध्यक्ष के रूप में देश को एक समर्थ संविधान देने में उनका विशेष योगदान रहा है। अपने समय काल के वरिष्ठ अधिवक्ता होने के कारण उनकी जयन्ती अधिवक्ताओं द्वारा अधिवक्ता के दिवस के रूप में मनाया जाता है। अधिवक्ताओं के लिये यह प्रेरणा लेने का दिन है। राजेन्द्र बाबू अधिवक्ता के साथ ही 10 वर्षों तक देश के राष्ट्रपति बने। एक अधिवक्ता को देश के प्रथम राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त है।”

प्रदेश अध्यक्ष पंकज यादव ने कहा कि “सहजता, त्याग और सादगी राजेन्द्र बाबू की निधि है। उन्होने आजादी की लडाई से लेकर नव निर्माण तक अपना योगदान दिया। ऐसे महान लोगों को स्मरण रखने से रचनात्मक ऊर्जा मिलती है।”

अधिवक्ता दिवस के अवसर पर महेंद्र कुशवाहा, अशोक कुमार कनौजिया, शाहनवाज आलम, प्रदीप कुमार पांडेय, राज कुमार सिंह, कमला चौबे, ईश्वर जायसवाल, अविनाश यादव, बेचन राम, त्रिलोकीनाथ केसरी समेत अन्य अधिवक्तागणों ने भी अपने विचार व्यक्त किया।

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