आस्था का केंद्र है विंढमगंज स्थित दो नदियों के संगम पर बना सूर्य मंदिर

धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)

विंढमगंज। सततवाहिनी नदी व कुकुर डूबा नदी के किनारे स्थापित सुर्य मंदिर, सोनभद्र सहित झारखंड बिहार छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के भक्ति विश्वास का प्रतीक है। यहां पर दूर दराज से लोग छठ महापर्व करने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि दो नदियों के संगम स्थल पर छठ महापर्व करने से मनोकामना पूर्ण होती है।

उत्तर प्रदेश,झारखंड को विभाजित करने वाले सतत वाहिनी नदी के संगम तट पर स्थित सूर्य मंदिर की महिमा अपार है। यहां पर पूरे साल भक्तों का ताता लगा रहता है। जिले का सबसे प्राचीन यह सूर्य मंदिर है यहां हर साल कई प्रांत के लोग छठ महापर्व करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। जब यह इलाका घनघोर जंगल था तब से ही यहां पर छठ महापर्व होते आ रहा है ।1902 ईo में जब अंग्रेज अधिकारी विंडम साहब ने विण्ढमगंज नगर को बसाया था तब बिहार के पटना साइड के काफी लोग विंढमगंज आए और यहीं पर बस गए ।उसी समय से यहां पर छठ पर्व भी यहां लोग करते आ रहे है ।डीहवार बाबा के प्रांगण में जब राम मंदिर का निर्माण हुआ तो राम मंदिर में ही भगवान सुर्य की एक छोटी मूर्ति स्थापित कर दी गई थी। बाद में सन क्लब सोसायटी ने संगम स्थल पर एक विशाल सूर्य मंदिर का निर्माण कराया ।सुर्य मंदिर का निर्माण सन क्लब के लोगों ने श्रमदान करते हुए और एक ₹1 का चंदा लेकर कराया ।तब से छठ पर्व पर जिले में सबसे बड़ा आयोजन विण्ढमगंज में होता है। अंबिकापुर छत्तीसगढ़ से आए सुरेश केसरी का परिवार हर साल यहां पर छठ पर्व करने के लिए आते हैं।

उन्होंने बताया कि भगवान सूर्य से यहां पर हमने जो भी मांगा है वह हमेशा पूरा हुआ है ।इसी तरह मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से सरजू राम पिछले 10 साल से विण्ढमगंज सूर्य मंदिर पर छठ महापर्व करने के लिए आते हैं ।उनका कहना है कि शादी के 35 साल बाद भगवान सूर्य की कृपा से उनको एक पुत्र का जन्म हुआ है तब से वह हर साल यहां छठ पर्व करने आते हैं। हर साल कई प्रांत के हजारों लोग छठ महापर्व पर विण्ढमगंज में जुटते हैं लेकिन इस साल कोरोना संकट होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ काफी कम है। दूसरे प्रांत से आने वाले श्रद्धालु नहीं के बराबर हैं। मंदिर का सजावट का काम अंतिम चरण में चल रहा है ।पर्व करनेवाली व्रती के लिए पंडाल लगवाया जा रहा है ।व्रती महिलाओं व आगंतुकों को प्रवेश के पूर्व ही सैनिटाइजर करने की व्यवस्था तथा मास्क लगाने के पश्चात ही प्रवेश की अनुमति दिए जाने हेतु जगह जगह बांस बल्ली से बैरिकेडिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। चार दिवसीय इस महापर्व पूरे विधि विधान से लोग करते हैं।

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