सौभाग्य और सौंदर्य प्रदान करता है करवा चौथ का यह पावन व्रत

कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करवाचौथ का त्योहार मनाया जाता है। पति के दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सुहागिनें यह व्रत करती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्य प्रदान करने वाला अन्य कोई दूसरा उपवास नहीं है। यह व्रत सूर्योदय से पहले आरंभ होकर रात में चंद्र दर्शन के बाद संपूर्ण होता है। इस व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय, श्रीगणेश एवं चंद्रमा का पूजन किया जाता है।

करवाचौथ का त्योहार दिवाली से नौ दिन पहले आता है। सुहागिन स्त्रियां आजीवन इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के प्रभाव से पति को लंबी उम्र के वरदान के साथ संतान सुख का आशीर्वाद भी मिलता है। चंद्रमा पूजन से दांपत्य सुख का आशीष प्राप्त होता है। मान्यता है कि यह व्रत महिलाओं का सौंदर्य बढ़ाता है। इस व्रत में विवाहिताओं द्वारा सोलह शृंगार करना विशेष महत्व रखता है। इस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है और मन में शुद्धता आती है। करवाचौथ के दिन लाल और पीले वस्त्र धारण करें। व्रत रखने वाली स्त्री को काले और सफेद कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पत्नी के अस्वस्थ होने की स्थिति में पति भी ये व्रत रख सकते हैं। सुहाग की कोई भी वस्तु कूड़े में न फेंके। पूजा के लिए तैयार होते समय यदि चूड़ियां टूट जाएं तो उन्हें बहते जल में प्रवाहित कर दें। घर में न रखें। सफ़ेद चीज़ें जैसे दूध, दही या चावल का दान न करें।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!