फीकी पड़ रही दीवाली, बाजारों में नही दिख रही रौनक

रमेश यादव ( संवाददाता )

– त्यौहारों पर भी कोविड 19 की मार
– घरों की सजावट पर महंगाई की मार
– रंग – पेंट व चुने की दुकानों पर ग्राहकों का टोटा
– दिहाड़ी मजदूरों एवं किसानों को झेलनी पड़ रही हैं महंगाई की मार
– दुकानें तो सजी लेकिन ग्राहक नदारत

दुद्धी। दीपावली पर्व अब लगभग एक पखवाड़े ही शेष रह गया है।ऐसे में ग्रामीण अपने घरों की साज-सज्जा व रंग-रोगन से लेकर लिपाई पोताई के काम में जुट गए हैं, लेकिन इस बार महंगाई त्योहार पर भारी पड़ती दिख रही है।जिससे रंग -पेंट व चुने की दुकानों पर सन्नाटा दिख रहा है।क्योंकि इस साल कोरोना महामारी के कारण ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में भी उतनी रौनक नही देखी जा रही हैं जितनी पिछले साल थी। एक तरफ लॉकडाउन की मार तो दूसरी तरफ महंगाई की दोहरी मार झेल रहे लोग उत्साह के साथ अपने घरों को सजाने में नही जुटे हैं।
महंगाई के चलते ग्रामीण इलाकों में किसानों की दिपावली फीकी पड़ती दिखाई दे रही है। इसका मुख्य कारण दिपावली को लेकर बाजार में रंग-रोगन के सामान आसमान पर हैं, जिसके चलते किसानों को अपना घर सजाना महंगा पड़ रहा है। जैसे-तैसे उन्होंने घरों की लिपाई-पुताई शुरू कर दी है, लेकिन त्योहार की चमक उनके चेहरे पर नहीं दिख रही है।14 नवंबर को लक्ष्मी पूजा यानि दिपावली का पर्व मनाया जाएगा। इस मद्देनजर में क्षेत्र के किसान अपने घरों की साज-सज्जा व रंग-रोगन लिपाई पोताई के काम में जुट गए हैं। लेकिन महंगाई के चलते लोग अपने बजट के अनुसार से खरीदारी कर रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रंग-रोगन के सामान खरीदने में कुछ अधिक दाम देने पड़ रहे हैं। रंग, पेंट और डिस्टेपर रंग के दामों में वृद्धि हुई है। महंगाई की मार सभी सामानों पर पड़ रही है। इससे साफ है कि इस बार दीपावली में घर को चमकाने मे ज्यादा रकम खर्च करना पड़ रहा है। इससे वे चिंतित है।

रंग पेंट व चुने पर महंगाई की मार –

इस वर्ष घरों के रंग-रोगन का सामान 10 से 20 फीसदी तक महंगे हो गए हैं।कोविड 19 एवं डीजल पेट्रोल के दाम बढऩे से सामान ढ़ुलाई महंगा पड़ रहा है। व्यापारियों को भाड़ा अधिक देना पड़ रहा है, जिसका असर बाजार पर दिख रहा है। सजावट के लिए मिलने वाले डिस्टेंपर, पुट्टी व रंग कुछ महंगे हो गए हैं। इन सामानों को खरीदने के लिए लोगों को ज्यादा दाम चुकाने पड़ रहे हैं। पिछले साल की तुलना में 20 से 25 फीसदी का अंतर आ गया है, जिससे लोगों की जेब ढीली हो रही है।

बाजार में फिलहाल नहीं दिख रही रौनक-

किसानों के लिए खेती ही आय का एकमात्र जरिया होता है, जिसे बेचकर वे अपना खर्च वहन करते हैं। क्षेत्र में इस साल भी औसत से कम बारिश हुई है। इसके चलते साधनविहीन किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। वहीं जिन किसानों ने हाईब्रिड फसल लिए थे। वे धान कटाई के बाद जल्द से जल्द थ्रेसिंग कर रहे हैं। ताकि उन्हे बेचकर त्योहार के लिए खरीददारी कर सके। इसके चलते बाजार में भी अभी रौनक कम ही दिखाई दे रहा है। इस पर त्योहारी सामानों के महंगे होने से किसान खर्च पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें चिंता सताने लगी है कि कैसे घर को चमकाएंगे और दिवाली का पटाखा जलाएंगे।

मजदूरों की बढ़ी परेशानी –

मजदूरी कर गुजर-बसर करने वाले तबके के लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है। दिनभर काम के बाद बमुश्किल दो वक्त का खाना जुटा पाते हैं। दुद्धी कस्बे में प्रतिदिन सैकड़ों दिहाड़ी मजदूर काम करने के लिए आते हैं लेकिन इस बार दीपावली पर्व को लेकर खास रौनक नही दिख रही हैं ।त्योहार खर्च के कारण उनके घर का आर्थिक बजट गड़बड़ा गया है। बढ़े हुए दामों में त्योहारी सामान खरीदने में दिक्कत हो रही है।

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