दो बैलों का अद्भुत चमत्कार देखने को उमड़े श्रद्धालु, बना कौतूहल का विषय

आलोक शर्मा (संवाददाता)

आंवला । तहसील आंवला के ग्राम रामनगला में दो बैलों का अद्भुत चमत्कार देखने के लिए दूर -दुर से पहुंच रहे है श्रद्धालु जिला बदायूं के आसपास दो अनजान बैलों को चमत्कारी बताया जा रहा है जिसकी चर्चा बरेली बदायूं के आसपास जिलों में भी हो रही है उन दो बैलों को लोग चमत्कारी नंदी और भोलेनाथ का रूप मान रहे हैं लोग इतना ही नहीं गांव के आसपास रहने वाले दो बैल अचानक में नंदी और भोलेनाथ के रूप में लोगों को दर्शन दे रहे हैं जहां पर दोनों बैल रहने लगे हैं वहीं पर लोगों के द्वारा एक बड़ा सा मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया जा रहा है इतना ही नहीं एक मंदिर पर रहने वाले दो बैल सुबह भोर के समय गंगा स्नान को अकेले ही जाते हैं यह चमत्कारी बैलों की चर्चा क्षेत्र में बिजली की तरह फैल रही है ।

बदायूं जिले के थाना दातागंज क्षेत्र के गांव धनौरा में एक मणि पर चमत्कारी बैलों को देखने के लिये श्रद्धालुओं का मेला भी लगने लगा है और मेला में स्थित मंदिर भी एक चमत्कारी आस्था का केंद्र बन चुका है लोग वौलों के ऊपर हाथ रख कर मन्नत मांगते हैं बही पर दूर दराज से महीनों से इन चमत्कारी वैलों को देखने के लिए लोग भी आ रहे हैं आंवला क्षेत्र के गांव रामनगला से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ट्रैक्टर ट्रालीओं से चमत्कारी भोले नाथ व नंदी बाबा के लिए देखने को पहुंचे आंवला से करीब 50 से 55 किलोमीटर दूर बदायूं के थाना दातागंज के गांव का धनौरा में चमत्कारी दो बैलों को लेकर प्रतिदिन बहा पर मेला की तरह भीड़ लगने लगी है वहीं पर मणि के पुजारी महेंद्र का कहना है कि दो बैलों को करीब 1 साल पहले गांव के आसपास देखा था और उस समय दोनों बैलों की जोड़ी बहुत छोटी थी और गांव के लोगों ने उन्हें बांधने का प्रयास भी किया परंतु जिस किसी ने उन्हें बांधा तो बह बीमार हो गये और फिर गांव के लोगो को उन्हे छोड़ना पड़ा फिर दोनो बैल गंगा के किनारे स्थित एक मणि पर आकर रहने लगे बताया जाता है कि मणि से लगभग 300 मीटर दूरी पर स्थित गंगा में जाकर प्रतिदिन दोनों बैलों की जोड़ी भोर के समय अचानक गंगा मे स्नान करने के लिए गायब हो जाती है आज तक किसी ने भी बैलो को गंगा कि ओर जाते नहीं देखा लेकिन गंगा की ओर से लौटते हुए प्रतिदिन लोग देखते रहते हैं और जिनको मन्नत मांगनी होती है बह दोनों बैलो पर हाथ फिरता है इसके बाद मंदिर में रखी कलश मटकी पर अंगुली रखता है अगर मटकी घूमने लगी तो समझो उसकी मन्नत पूरी हो गई और गांव के लोग दोनों बैलों में अंधविश्वास भी मान रहे हैं लेकिन उस क्षेत्र में दोनों बैल चमत्कारी आस्था का केंद्र बन चुका है गांव रामनगला से सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर ट्राली से श्रद्धालु देखने के लिए पहुंचे जिसमें अनिल कुमार, लखपत सिंह, दुर्गपाल, नत्थू लाल ,बीरपाल ,सुनील कुमार ,ओमेंद्र अरविंद ,भजनलाल आदि श्रद्धालु सैकड़ों की संख्या में महिलाएं भी शामिल थी।

सोमवार और मंगलवार रखते हैं दोनों बैल व्रत

वहीं के पुजारी महेंद्र जी ने बताया कि दोनों बैल सोमवार और मंगलवार को अपना व्रत रखते हैं जिसको देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं व्रत होने के उपरांत बह किसी का पानी भी नही पीते है और प्रसाद भी नहीं खाते हैं गांव रामनगला की एक महिला ने प्रसाद खवाने का प्रयास किया परंतु उन्होंने नहीं खाया पुजारी ने बताया कि सप्ताह में मंगलवार और सोमवार को यह दोनों नंदी बाबा अपना-अपना व्रत रखते हैं लोग उन्हे नंदी बाबा भोलेनाथ का रूप मान रहे हैं मंदिर में भारी संख्या में लोग पूजा भी कर रहे हैं।

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