बिजलीकर्मियों का कार्य बहिष्कार : बिजली ने रोकी जिंदगी की रफ्तार, चारों ओर मचा हाहाकार

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ आज दूसरे दिन भी बिजली कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार जारी रहा। हालांकि देर शाम तक यूपी सरकार और बिजलीकर्मियों के बीच समझौते के बाद बिजली आपूर्ति धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी।

आज सुबह जिला मुख्यालय सहित आस-पास के इलाकों की बिजली गुल होने से हाहाकार मच गया। तमाम छोटे-बड़े इलाकों में बिजली न आने से घरों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो गयी। बिजली व्यवस्था ठप रहने के कारण जन जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया, बल्कि यह कहें कि बिजली ने लोगों की जिंदगी की रफ्तार को धीमी कर दी। बिजली ठप रहने से सबसे अधिक असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा। आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं, ब्लड बैंक को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को चिंता सताने लगी। हालांकि इसके लिए जेनरेटर का सहारा लिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह स्थिति एक दो दिनों तक और रही, तो मुसीबत खड़ी हो सकती है। बड़े व्यवसायी तो किसी तरह जेनरेटर का सहारा लेकर प्रतिष्ठानों का संचालन किया लेकिन छोटे व्यवसायी शाम ढ़लते ही दुकानों का शटर गिरा दिया। पांच दिसंबर को बिजली की आपूर्ति कुछ हद तक ठीक रही लेकिन छह दिसंबर को नौ बजे सुबह के बाद से आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। इसका असर सरकारी एवं गैर सरकारी दफ्तरों में भी देखा गया। जिन कार्यालयों में जनरेटर नहीं है, वहां पर संचिकाओं के निष्पादन में कर्मियों एवं अधिकारियों को घोर कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।

पेयजलापूर्ति ठप, उपभोक्ता परेशान

बिजली कर्मियों के हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत लोगों को पानी के लिए हुई। सोमवार को तो जैसे तैसे काम चल गया लेकिन मंगलवार को सुबह पानी के लिए लोगों को इधर उधर भटकना पड़ा। कुछ लोगों ने तो जेनरेटर की व्यवस्था करके घरों में लगे पंप से पानी का इंतजाम कर लिया। हालांकि इस दौरान टेंट वालों ने भी खूब पैसा वसूला। एक घंटे के जेनरेटर का चार्ज करीब 1000 रुपए मांग रहे हैं। परेशान जानता ने 1000 रुपए देकर पानी और इन्वर्टर की बैटरी को किसी तरह चार्ज किया।

बिजली गुल होने से मरीज रहे परेशान

प्रसोत्तर केंद्र और ब्लड बैंक की देर रात तक रही बिजली गुल रहने के कारण मरीज, उनके तीमारदार और स्वस्थ्यकर्मी गर्मी से हलकान दिखे। गर्मी के कारण मरीज कागज और कपड़े से हवा करते रहे।

प्रसोत्तर केंद्र में तैनात नर्सों ने बताया कि “किसी तरह इनवर्टर के सहारे दो बल्ब जलाकर काम चला रहे हैं लेकिन पंखा नहीं चलने से उमस भरी गर्मी में मरीजों का बुरा हाल है। यदि प्रसव के लिए कोई मरीज आ जाती है तो भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।”

वहीं ब्लड बैंक में भी स्टोर ब्लड को सुरक्षित रखने के लिए जेनेरेटर का सहारा लेना पड़ा

परेशान दिखे मोबाइल उपभोक्ता

बिजली व्यवस्था ठप होने के कारण हजारों उपभोक्ताओं का मोबाइल स्वीच आफ हो गया। कुछ उपभोक्ता जनरेटरों का सहारा लेकर मोबाइल को किसी तरीके से चार्ज कर पाए। मोबाइल चार्ज के लिए जनरेटर मालिकों को द्वारा भी शुल्क वसूला गया।

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