फीस माफी के लिए अभिभावकों ने किया विरोध प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

अभिभवाकों को याचक समझने की भूल कर रही है योगी सरकार

सोनभद्र । कोरोना संकट के चलते स्कूलों को बंद रखने के निर्देश के बावजूद ऑनलाइन कक्षाएं चलाने के नाम पर काफी प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से फीस जमा करवाने के लिए कह रहे हैं। अभिभावक स्कूल नहीं खुलने तक फीस देने के मूड में नहीं है। जबकि निजी स्कूल संचालक फीस जमा करने के लिए लगातार अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं। जिससे निजी स्कूल के खिलाफ अभिभवाक मंच का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इसी क्रम में आज नगर के बढ़ौली चौक पर अभिभवाक मंच ने निजी विद्यालयों द्वारा अध्यापकों को वेतन देने के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक दोहन करने का आरोप लगाया तथा प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार तनुजा निगम को सौंपा।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि “निजी स्कूलों में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है। फीस वृद्धि, यूनीफार्म, वाहन शुल्क आदि के नाम अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा फीस संबंधित जारी शासनादेश में अध्यापकों को वेतन दिए जाने नाम पर निजी विद्यालयों को पूरी फीस अभिभावकों से जमा कराने का निर्देश दिया गया है। जबकि लाकडाउन के दौरान विद्यालयों ने ज्यादातर अध्यापकों की छुट्टी कर दिया है और जो अध्यापक आनलाइन पढ़ाई की रस्म पूरी कर रहे हैं, उनको भी आधा ही वेतन दिया जा रहा है। बावजूद इसके सरकार के इशारे पर निजी विद्यालय आनलाइन पढ़ाई की रस्म अदायगी मात्र करते हुए अभिभावकों से पूरी ट्यूशन फीस तो ले ही रहे हैं। इसके अतिरिक्त वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क के नाम पर भी छात्रों को हजारों हजार रुपये जमा करने को विवश कर रहे हैं। जिससे अभिभावकों में प्रदेश सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। जबकि लाकडाउन के कारण आज हर कार्य वर्ग के अभिभावक आर्थिक रुप से परेशान हैं। बगैर विद्यालय खुले और समुचित पठन-पाठन कराये ट्यूशन फीस तथा अतिरिक्त शुल्क सरकार द्वारा वसूली कराये जाने से अभिभावक अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इसलिए अभिभावकों एवं छात्र हित को ध्यान में रखते हुए शुल्क संबंधित मामले को गंभीरता से लेते हुए इंटरमीडिएट तक के विद्यालयों द्वारा लिए जा रहे अतिरिक्त वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क, लाइब्रेरी आदि शुल्क पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ सभी कार्यरत अध्यापकों को वेतन दिए जाने की शर्त पर ट्यूशन फीस में भी 50% की छूट अभिभावकों को देने का निर्देश (शासनादेश) जारी किया जाय।”

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