यहां श्मशान घाट पर भी दिखेगा महिला सशक्तिकरण, पढ़ें पूरी खबर

कहावत है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। काम की वजह से लोगों का सम्मान भी बढ़ता है । आज के समय में महिलाएं भी हर काम को बखूबी करने लगी हैं, लेकिन कुछ काम ऐसे होते हैं जिनको हर महिला नहीं करना चाहती है । ऐसा ही एक काम है श्मशान घाट पर मुर्दों का दाह संस्कार कराना ।ज्यादातर श्मशान घाट पर यह काम पुरुषों के द्वारा ही कराया जाता है, लेकिन जौनपुर के पिलकिछा घाट पर मुर्दों का अंतिम संस्कार कराने का काम दो महिलाएं करती हैं । यह काम उन्हें विरासत में नहीं बल्कि मजबूरी में करना पड़ रहा है ।

जौनपुर के पिलकीक्षा घाट पर सरिता और महरीता नाम की दो चचेरी बहनें पिछले 7 साल से यह काम कर रही हैं ।
सुनने में यह अजीब जरूर लगता है, लेकिन यह दोनों महिलाएं आज बखूबी इस मुश्किल काम को भी कर रही हैं । सरिता और महरिता नाम की चचेरी बहनों को मजबूरी में यह काम चुनना पड़ा। हालांकि इसके पहले उनके पति ही घाट पर अंतिम संस्कार कराने का काम करते थे, लेकिन बीमारी के चलते उनकी मौत हो गई थी । अब उनके सामने यही समस्या थी कि वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए क्या करें । ऐसे में समाज के विरोध के बाद भी दोनों चचेरी बहनों ने मुर्दों के दाह संस्कार कराने का काम चुना । आज इस मुश्किल घड़ी में भी वह रोज 8 से 10 लाशों का दाह संस्कार कराती हैं । जिससे उन्हें 200 से लेकर 300 रुपये प्रति दाह संस्कार के मिल जाते हैं ।इन्हीं पैसों से वह अपने परिवार का पेट भरने का काम कर रही हैं।

अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!