रिया चक्रवर्ती और भाई शोविक को बम्बई हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, अब जमानत याचिका पर 29 सितंबर को होगी सुनवाई

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले से जुड़े ड्रग्स केस में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक को बंबई हाई कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है । हाई कोर्ट ने आज सुनवाई टाल दी । HC में अब जमानत याचिका पर 29 सितंबर को सुनवाई होगी । रिया और शोविक ने 22 सितंबर को हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी ।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ड्रग्स केस में 9 सितंबर को रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था । इससे पहले उनके भाई शौविक चक्रवर्ती को एनसीबी ने गिरफ्तार किया था ।इस मामले में करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है । रिया और शोविक न्यायिक हिरासत में हैं ।

रिया चक्रवर्ती ने जमानत याचिका में कहा है कि वह निर्दोष हैं और मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ‘जानबूझ कर’ उन पर और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगा रहा है ।

चक्रवर्ती ने कहा है कि वह सिर्फ 28 साल की हैं और एनसीबी की जांच के अलावा, वह साथ ही साथ पुलिस और केंद्रीय एजेसियों की तीन जांच और ‘समानांतर मीडिया ट्रायल’ का सामना कर रही हैं ।

रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में दावा किया है कि राजपूत मादक पदार्थ खास तौर पर गांजा का सेवन करते थे, और वह तबसे इसका सेवन कर रहे थे जब वे दोनों संबंध में भी नहीं थे ।

उन्होंने कहा कि कभी-कभी वह उनके लिए ‘कम मात्रा में’ मादक पदार्थ की खरीद भी करती थीं और ‘कई अवसरों पर उन्होंने इसके लिए भुगतान भी किया ।’ लेकिन वह खुद किसी भी मादक पदार्थ गिरोह की सदस्य नहीं हैं ।

उन्होंने दावा कि सिर्फ राजपूत ही मादक पदार्थ का सेवन करते थे । याचिका में कहा, ”आवेदक (चक्रवर्ती) निर्दोष हैं और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। ”

अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें एनडीपीएस अधिनियम की धारा 27-ए के तहत गलत तरीके से फंसाया गया है । और जब उनके पास से कोई मादक पदार्थ जब्त नहीं किया गया और एनसीबी सभी आरोपियों के पास से सिर्फ 59 ग्राम मादक पदार्थ जब्त करने में सफल रही तो जमानत पर रोक लगाने का नियम उन पर लागू नहीं होता है ।

चक्रवर्ती पर एनसीबी ने कई आरोपों के लिए मामला दर्ज किया है, इसमें मादक पदार्थ की अवैध तस्करी का वित्तपोषण करना भी शामिल है । नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 27-ए के तहत मामला दर्ज किया गया है और यह धारा आरोपी को जमानत देने पर रोक लगाती है ।

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