जिला कृषि रक्षा विभाग ने किसानों को बताए कई अहम टिप्स, आप भी जान लें

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत । इस समय वर्षा कम होने एवं तापमान अधिक होने के कारण धान, गन्ना तथा अरहर की फसल में पत्ती लपेटक, सैनिक कीट, गंधी कीट, तना भेदक एवं गन्ने के लाल सड़न रोग के प्रकोप की सम्भावना है। जिनका प्रबंधन/नियंत्रण अति आवश्यक है, अन्यथा यह फसल को बहुत हानि पहुंचा सकते है। यह कहना है जिला कृषि रक्षा अधिकारी का । कृषि विभाग ने बताया कि फसलों में किसी भी प्रकार के रोग/कीट सम्बन्धी समस्याओं के निदान हेतु रोगग्रस्त पौधे अथवा कीट की फोटो अथवा प्रभावित फसल के लक्षणों से सम्बन्धित विवरण लिखकर 9452247111 या 9452257111 पर व्हाट्सएप् अथवा एस0एम0एस0 करें।

पत्ती लपेटक पहचान- यह लार्वा अवस्था में हानि पहुंचाते है, पत्तियों के दोनो किनारों को जोड़कर नली जैसी संरचना बनाकर उसके अन्दर रहते हैं तथा पत्तियों की हरियाली को खुरचकर खाते हैं। पत्ती का प्रभावित हिस्सा सफेद एवं सूखा जाता है। प्रबन्धन एवं नियंत्रण हेतु पहचान-खेत एवं मेडों को घास मुक्त एवं मेंडों की छटाई करना चाहिए, समय से रोपाई करना चाहिये, फसल की साप्ताहिक निगरानी करना चाहिये। प्रभावित क्षेत्रफल अधिक होने पर नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20ईसी, 500 मि0ली0 एकड़ अथवा एसीफट 75 प्रतिशत एसपी 400 मि0ली0/एकड़ अथवा मोनोक्रोटोफास 36प्रतिशत एसएल, 1.25ली./हे0 अथवा क्यूनालफास 25ईसी, 15 ली0/हे0 की दर से 400 से 500 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करें।

तना भेदक पहचान- इस कीट का लावार्प कल्ले के निचले हिस्से को भेदकर अन्दर से खाता है, जिससे वह सूख जाता है, जिसे मृत गोभ कहते हैं। प्रभावित पौधो की पेनिकल एवं बाली सूख जाती है तथा खींचने पर आसानी से खिच जाती है। प्रबन्धन एवं नियंत्रण- गर्मी की गहरी जुताई करनी चाहिये, खेत एवं मेंडों को घास मुक्त रखना चाहिए, समय से रोपाई एवं फसल की निगारानी करनी चाहिए। रासायनिक नियंत्रण हेतु कार्वोफ्यूरान 3जी 25 कि0ग्रा0/हे0 अथवा क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 0.4प्रतिशत जी 10 कि0ग्रा0/हे0 की दर से खेत में नमी की अवस्था में बुरकाव करें। मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत एसएल, 1.25ली./हे0 अथवा क्यूनालफास 25ईसी 1.5 ली0/हे0 अथवा क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 18.5एससी 150मि0ली/हे0 अथवा फिप्रोनिल 5प्रतिशत एससी 1.5 ली0/हे0 अथवा थायोमेथाक्साम 25प्रतिशत डब्लूजी 100ग्रा0/हे0 की दर से 400 से 500 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करें।
गंधी बग पहचान- इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ लम्बी टाॅगों वाले भूरे रंग के विशेष गंध वाले होते है। जो धान की बालियों की दुग्धावस्था में दानों में बन रहे दूध को चूस कर क्षति पहुंचाते हैं। प्रबन्धन एवं नियंत्रण गर्मी की गहरी जुताई करनी चाहिये। खेत एवं मेंडों को घास मुक्त रखना चाहिए। एजैडिरैकिटन 0.15 प्रतिशत ईसी की 2.5 ली0 मात्रा को प्रति हे0 500-600 ली0 पानी में घोल कर छिडकाव करें। फेनवेलरेट 0.04 प्रतिशत धूल 20-25 कि0ग्रा0/हे0 की दर से बुरकाव करें।
सैनिक कीट पहचान- इस कीट की सूडियाॅ भूरे रंग की होती है जो दिन के समय किल्लों के मध्य अथवा भूमि की दरारों में छिपी रहती है तथा शाम को बाहर निकल कर बालियों को छोटे छोटे टुकड़ों के काट कर गिरा देती है। प्रबन्धन एवं नियंत्रण- खेत की गहरी जुताई, खेत व मेड घास मुक्त, नियमित निगरानी करनी चाहिये। फेनवेलरेट 0.04 प्रतिशत धूल 20-25 कि0ग्रा0/हे0 की दर से बुरकाव करें।
गन्ने का लाल सड़न रोग की पहचान- गन्ने इस रोग की प्रारम्भिक अवस्था में पौधे की ऊ पत्तियाॅ पीली पड़कर सूख जाती है। बाद में गन्ने के सम्पूण्र ऊपरी हिस्सा सूखने लगता है। प्रभावित पौधे की आॅखे (इण्टरनोड) काली पड़कर मृत हो जाती है तथा बाद प्रभावित आॅख से जुडे अन्य हिस्सों में भी संक्रमण फैल जाता है। गम्भीर अवस्था में तने को चीरने पर मध्य भाग में लाल रंग की सडन दिखई देती है तथा तेज सिरके जैसी गंधी आती है। प्रबन्धन एवं नियंत्रण- बीज की बुवाई से पूर्व बीज शोधन अवश्य करे, फसल चक्र अपनाये, गन्ने की रोग प्रतिरोधक प्रजातियों की बुबाई करें। ट्राइकोडर्मा की 25 कि0ग्रा0 को 75 कि0ग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर बुबाई से पूर्व खेत में मिलाकर भूमि शोधन करें।

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