सफलता की चाह रखने वाले व्यक्ति को खुद को हमेशा तैयार रखना हैं जरूरी, जानें

अगर अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं तो आपमें जोखिम उठाने की हिम्मत होनी चाहिए। खुद को दांव पर लगाए बिना आप अपनी पूरी क्षमता और दृढ़ता से आगे नहीं बढ़ सकते, जो कामयाबी के लिए आवश्यक है।

भविष्य की चिंता करना सजगता की निशानी है। लेकिन यह चिंता अगर निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ने के रास्ते में संभावित जोखिमों का सामना करने से रोकने लगे तो सतर्क हो जाना जरूरी है। दरअसल चिंता का हावी होने लगना सजगता नहीं, डर को प्रश्रय देना है। अगर आप जोखिम उठाने से बचते हैं तो इसका सीधा मतलब यह है कि आप अपनी क्षमताओं को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। जबकि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए जोखिम उठाना खुद को पूरे समर्पण और समूची क्षमता से आगे बढ़ने की तैयारी होती है। आईवियर स्टार्टअप ‘लेंसकार्ट’ के पीयूष बंसल की कहानी से यह बात आसानी से समझी जा सकती है, जो बतलाती है कि खुद को दांव पर लगाए बिना सफलता के शिखर पर नहीं पहुंचा जा सकता।

सपना और सामर्थ्य :
दिल्ली के रहने वाले पीयूष अमेरिका में एक अच्छी जॉब में थे। वहां सब कुछ ठीकठाक था, लेकिन कुछ बड़ा करने का सपना उनके मन में पल रहा था। इसको लेकर वह इतने दृढ़ थे कि 2007 के मंदी वाले माहौल में जब ज्यादातर लोग अपनी जॉब बचाने की फिक्र में थे, वह अमेरिका से भारत वापस आ गए। बेशक यह दूसरों को हैरान करने वाला फैसला था, पर पीयूष आश्वस्त थे कि कुछ बड़ा करने के लिए इतना जोखिम उठाना ही पड़ता है।

निरंतर तैयारी :
सफलता की चाह रखने वाले व्यक्ति के लिए खुद को हमेशा तैयार रखना जरूरी है। इसका मतलब है कि आप लक्ष्य तक पहुंचने के लिए निरंतर खुद को क्षमतावान बनाए रखें। पीयूष ने भारत लौटने के बाद स्टार्टअप के क्षेत्र में कदम आगे बढ़ाया, जिसमें उन्हें अनुभव और कामयाबी दोनों हासिल हुए। इसी दौरान उन्होंने उद्यमिता में प्रबंधन का डिप्लोमा भी हासिल किया ताकि अपने लक्ष्य के लिए खुद को और सक्षम बना सकें। आखिरकार 2010 में उन्होंने ऑनलाइन कॉन्टेक्ट लेंस की बिक्री के लिए लेंसकार्ट की स्थापना की, जो जल्द ही तमाम अन्य तरह के चश्मे भी मुहैया कराने लगा।

बड़ी सफलता :
जोखिम उठाने का पुरस्कार बड़ी सफलता के रूप में सामने आया। लेंसकार्ट आज एक अरब डॉलर वाली कंपनियों के क्लब में शामिल हो चुका है। पीयूष की मानें तो शुरुआत में खुद उन्हें अंदाजा नहीं था कि उन्हें इतनी बड़ी कामयाबी मिलने वाली है। लेकिन शुरुआत से जो चीज जाहिर थी, वह थी- लक्ष्य तक पहुंचने के लिए खुद को दांव पर लगाने का उनका दृढ़-निश्चय। बेशक उन्होंने बड़ा जोखिम उठाया था, लेकिन इसके बिना इतनी बड़ी सफलता मिलना भी संभव नहीं होता।

आगे की राह :
उन्होंने अपनी सफलता से अनेक बड़े निवेशकों का भरोसा हासिल किया है। अब वे देश के लोगों को आंखों की देखभाल के प्रति जागरूक बनाना चाहते हैं, ताकि उन 60 करोड़ लोगों को खुद से जोड़ सकें, जिन्हें आईवियर की जरूरत है।

सीख: मनुष्य को कोई नया प्रयास शुरू करने के लिए सिर्फ एक दिन काफी है

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