वसूली की मिली शिकायत तो पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR के साथ होगी बर्खास्तगी की कार्यवाही- सूत्र

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम योगी के कड़ें तेवर के बाद जिले के अधिकारी भी अपना रुख साफ कर दिया है। कोरोना जैसी महामारी में कोरोना योद्धा जैसे सम्मान मिलने के बाद पुलिस की छवि में काफी सुधार हुआ था और पुलिस के प्रति लोगों का नजरिया भी बदला था लेकिन इधर बीच सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण को लेकर लगाए गए प्रतिबन्ध में छूट मिलने के बाद अब सब कार्य सुचारू रूप से एक बार फिर पटरी पर आने लगा है। सोनभद्र का मुख्य व्यवसाय कहा जाने वाला खनन उद्योग भी अब धीरे-धीरे शुरू हो रहा है। चूंकि मजदूरों की किल्लत ने व्यवसाय को काफी प्रभावित भी किया था। ऐसे में खनन से जुड़े सभी व्यवसायी चाहे ट्रक मालिक हों या फिर खनन व्यवसायी एक बार फिर महामारी से उबरना चाहते हैं। लेकिन इस बीच जिले में लगभग हर थानों पर पुलिस की वसूली ने मोटर मालिकों से लेकर खनन मालिकों तक को परेशान कर दिया है।

ऐसा नहीं कि क्राइम मीटिंग में कप्तान द्वारा सख्त हिदायत नहीं दी जाती रही है लेकिन थाने पर पहुँचने के बाद सब कुछ ताख पर रख कर फिर वसूली में लग जाते हैं।

सूत्रों की माने तो लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए पुलिस कप्तान आशीष श्रीवास्तव ने जिले के सभी थानाध्यक्ष से लेकर पीआरबी तक को आडियो मैसेज के द्वारा खूब लताड़ लगाई। सूत्रों के मुताबिक पुलिस अधीक्षक ने साफ लब्जों में कहा कि जिस-जिस थाना क्षेत्रों में वसूली या उनके शह पर अवैध खनन कराये जाने की शिकायत मिल रही है वह संभल जाएं वरना उनके खिलाफ अब सिर्फ निलंबन या लाइन हाजिर तक की कार्यवाही ही नहीं होगी बल्कि उनके खिलाफ़ मुकदमा लिखकर सेवा बर्खास्तगी के लिए भी लिखा जाएगा। बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक ने बकायदे कई थानों के नाम भी लिए हैं जहां शिकायत ज्यादा मिल रही है। इससे साफ है कि पुलिस अधीक्षक ने मैसेज देने से पहले खुद भी इसकी तस्दीक कर ली है। बरहाल कप्तान ने सभी थानाध्यक्षों को सुधरने के लिए अंतिम मौका दिया है। अब यदि कोई वसूली या गलत कार्यों में लिप्त पाया जाएगा तो उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमें के साथ वहीं व्यवहार किया जाएगा जो अपराधियों के साथ किया जाता है।

अब देखने वाली बात यह है कि पुलिस अधीक्षक के इस फरमान का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है।

वसूली का ऐसा चलता है खेल

प्रतीकात्मक चित्र

गिट्टी-बालू लदे ट्रकों से या ओवरलोड वाहनों से वसूली करने के मामला कोई नया नहीं है । कई वर्षों से यह खेल अब बड़े भ्रष्टाचार का रूप ले चुका है । कई बार वसूली करने वाले पकड़े भी गए, कार्यवाही भी हुई लेकिन फिर सिफारिश या पैसों के दम पर बहाल हो गए और फिर दोबारा जब वे फील्ड में वसूली के लिए उतरे तो न सिर्फ अपना रेट बढ़ा दिया बल्कि खुलकर अपने काम को अंजाम देने लगे।
पुलिस कप्तान ने जो इशारा किया है उससे साफ है कि वे भी जानते है कि निलंबन या लाइन हाजिर इनके लिए कोई कार्यवाही नहीं है। इसलिए उन्होंने मुकदमा लिखने व बर्खास्तगी की बात कही है, लेकिन चालाक पुलिस कर्मी खुद वसूली नहीं करते बल्कि वे कुछ लोगों को इसके लिए महीने ओर रखे हुए हैं जो उनके लिए काम करते हैं जैसे ही कोई ओवरलोड वाहन या फिर खनन की गाड़ी गुजरती है तो वे दौड़कर हाथ देकर रोक देते हैं और फिर उनसे पैसे लेकर सिपाही या दरोगा को दे देते हैं । ऐसे में पुलिस कर्मी खुद को हाइलाइट नहीं करता और उसका काम भी हो जाता है। वहीं कुछ पुलिसकर्मी भीड़भाड़ वाले स्थान से हटकर आगे बढ़कर वसूली करते हैं । इसके लिए वे लगातार पहले वाले थाने के टच में रहते है ताकि उन्हें मालूम चल सके कि कौन सी गाड़ी आ ही है । मोटर मालिकों की माने तो कुछ थाने से महीना वसूला जाता है इसके लिए वे बकायदे कूपन छपवाते हैं या फिर कोड जारी करते है जिसे बताने या दिखाने पर महीने भर चलने की छूट होती है । लेकिन उनका शातिरपन इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे हर महीने कूपन का रंग या कोड चेंज कर देते हैं ।

बहरहाल पुलिस अधीक्षक की पहल निश्चित तौर पर सराहनीय होगा यदि इस पर अंकुश लग सका तो क्योंकि एक मोटर मालिक जितना लाभ नहीं कमाता उतना सिस्टम में बंट जाता है ।

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