बेबसी- आजादी के सात दशक बाद भी आदिवासी नाले का पानी पीने को विवश

– दशकों से उपेक्षित कुछ परिवारों को नही मिल रहा शुद्ध पानी

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

विंढमगंज(सोनभद्र)। दुुद्धी विकास खण्ड के डुमरा ग्राम पंचायत अंतर्गत बासीन गांव के गिधवाखाड़ी टोला निवासी दर्जनों आदिवासी परिवार आज भी नाले का गंदा पानी पीने को विवश है।आधुनिक युग में जहां लोग चांद की सैर करने लगे हैं और जागरूक तबका आरओ का पानी पी रहा है, वहीं इन गरीब आदिवासी परिवारों को आज भी नाले में चुआड़ खोदकर अपनी प्यास बुझाना नियति बनकर रह गयी है।ग्राम पंचायत द्वारा इनके लिए पेयजल की कोई समुचित व्यवस्था नही की गई।

गंदे नाले का पानी पी रहे आदिवासी परिवार की महिलाओं की मानें तो जब से निवास कर रहे हैं तब से गिधवाखाड़ी नाला में चुआड़ खोदकर पानी पीते चले आ रहे हैं।उसे भी गांव के कुछ शरारती तत्वों द्वारा गंदा कर दिया जाता है। पशु पक्षी भी उसी नाले का पानी पीते हैं।जिससे पशुओं के पैरों से पानी गंदा व संक्रमित हो जाता है।बेबसी में वही एक सहारा है, जो करीब एक किमी दूर चलने के बाद नसीब होता है।भुक्तभोगियों का आरोप है कि अब तक कितने प्रधान और विधायक ,सांसद आए और गए, लेकिन हम लोगों की हालात बद से बदतर ही बनी रही।बतादें कि खासतौर से इन परिवारों को बरसात और गर्मियों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि गर्मियों में जल स्तर नीचे चलें जाने से लोगों को नाले में चुआड़ खोदना पड़ता है। लेकिन सभी तरफ से खुला होने के कारण पशु एवं अन्य जानवर उस गड्ढे में चले जाते हैं। जिससे पानी गंदा हो जाता है तो वही बरसात में भर जाने से और भी बदत्तर स्थिति हो जाती हैं ।वर्तमान में जहां एक तरफ लोग हाईटेक जीवन जी रहे हैं तो वही आज भी गांवो में लोग लंबी दूरी से नाले का गंदा पानी ढोकर, पीने को बेबस और लाचार हैं ।
शुद्ध पेयजल के लिए जन प्रतिनिधियों को कई बार कहा गया लेकिन आज करीब 20-25 सालों से हम लोग गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं और कोई सुनने वाला नही है।
अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!