कोविड ड्यूटी के नाम पर चल रहा खेल, कोविड इंचार्ज ने सोशल मीडिया पर खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

● L-1 अस्पताल में ड्यूटी न लगाने के लिए चढ़ाए जाते हैं चढ़ावा – सूत्र

● डॉक्टर द्वारा किये गए पोस्ट पर कई सीनियर डॉक्टर का समर्थन, कहा मुद्दा जायज

● पूरे कोविड महामारी में कुछ चुनिंदा स्वास्थ्य कर्मी की लगाई गई ड्यूटी

● शिक्षा विभाग की तर्ज पर कई डॉक्टर घर बैठे उठा रहे वेतन

● स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई जांच में हुआ खुलासा

● 2 साल की जांच रिपोर्ट को किया जाय सार्वजनिक तो कईयों की बंध सकती है बोरिया-बिस्तर

● स्वास्थ्य विभाग में चल रहा सबकुछ ठीक

● कभी भी फुट सकता है कोरोना योद्धाओं का आक्रोश

सोनभद्र । जनपद में जैसे-जैसे कोरोना की संख्या में इजाफा हो रहा है वैसे-वैसे कोरोना योद्धाओं में आक्रोश भी बढ़ रहा है। कोविड इंचार्ज डॉ0 राम कुंवर की एक फेसबुक पोस्ट ने स्वास्थ्य महकमे की पोल खोल दी है। इतना ही नहीं इस फेसबुक पोस्ट में कई सीनियर डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी सहमति देते हुए सही ठहराया। जब डॉक्टरों को लगा कि विभाग में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया।

इस फेसबुक पोस्ट से इतना तो साफ हो गया है कि स्वास्थ्य विभाग के अंदर खाने में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। न किसी की सुनी का रही है और न किसी की चल रही। कोरोना महामारी में भले ही लोग डॉक्टरों को सम्मान कर रहे हो मगर उनके दर्द को देखने और सुनने वाला कोई नहीं है। डॉ0 राम कुंवर के फेसबुक पोस्ट से साफ है कि कोरोना की ड्यूटी में किस तरह अपने चहेतों की ड्यूटी न लगाकर कुछ डॉक्टरों से ही काम लिया जा रहा है। कई चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां कोरोना के नाम पर दुकान चल रही है। ड्यूटी ना लगाने के लिए बड़ी रकम ली जा रही है, इतना ही नहीं L-1 हॉस्पिटल में उन चिकित्सकों को लगाया गया है जो अपने केंद्र पर अकेले हैं। उनके आने से ये केंद्र प्रभावित या बंद रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ ऐसे तमाम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां या तो भवन नहीं हैं, जिसके कारण डॉक्टर नहीं जाते या फिर भवन हैं भी तो वे खुद नहीं जाते और घर बैठे वेतन उठा रहे हैं।

अब सवाल यह उठता है कि जिन केंद्रों पर अकेले डॉक्टर की तैनाती है उन केंद्रों को बंद कर L-1 अस्पताल में उनकी ड्यूटी लगाना कहां तक जायज है और यदि ड्यूटी लगाना ही है तो उन डॉक्टरों की तैनाती उन केंद्रों पर क्यों नहीं की जाती जो घर बैठे वेतन उठा रहे हैं।

सूत्रों की माने तो ऐसे तमाम केंद्र हैं जहां डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी वर्षों से घर बैठे वेतन ले रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ जांच करके रिपोर्ट भी दी गयी लेकिन आज तक उनपर कोई कार्यवाही नहीं हुई बल्कि उनका रेट बढ़ा दिया गया।

आपको बता दें कि विंढमगंज में तैनात एक चिकित्सक जिले के एक मात्र कोरोना विशेषज्ञ हैं जो प्रीवेंटिव मेडिसीन डिप्लोमा किए हुए हैं। मगर आज तक कोरोना विशेषज्ञ डाक्टर की तैनाती कभी भी L-1 हॉस्पिटल में नहीं किया गया ।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कोरोना योद्धा खुद लड़ रहे हैं।यदि ऐसे योद्धाओं को सही समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो इनका आक्रोश कभी भी बड़ा ज्वालामुखी बनकर फट सकता है और शायद तब तक काफी देर हो चुकी होगी।

आपको यह भी बतादें कि शासन के निर्देश पर प्रतिदिन जिला अस्पताल में कोविड-19 बैठक होती है लेकिन कोविड-19 बैठक में कभी इन बातों पर गौर नहीं किया गया और ना ही कभी चर्चा की गई। उम्मीद है कि खबर के बाद शायद प्रशासन इस ओर ध्यान देगा और होने वाले विस्फोट से बच सकेगा।

अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन द्वारा कराए गए निरीक्षण रिपोर्ट में वर्षों से गायब चल रहे डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों पर क्या कार्यवाही होती है?

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