स्व0 कमलापति त्रिपाठी पत्रकार सम्मान से सम्मानित हुए युवा पत्रकार पवन जायसवाल

हरिकिशन अग्रहरी (ब्यूरो)

अहरौरा । पंडित कमलापति त्रिपाठी की 115वीं जयंती के उपलक्ष में युवा एवं चर्चित पत्रकार पत्रकार पवन जायसवाल को स्व0 कमलापति त्रिपाठी पत्रकार सम्मान के रूप में सम्मान पत्र के साथ ₹50000 की सम्मान राशि के साथ सम्मानित किया गया। पत्रकार पवन जयसवाल को कमलापति त्रिपाठी सम्मान से नवाजे जाने के बाद पत्रकार साथियों, प्रियजनों मित्रों, मीडिया के देश भर के साथियों में हर्ष की लहर दौड़ गयी। वहीं पत्रकार पवन जयसवाल को लोगों की बधाइयो का तांता लगा हुआ है।

बता दें कि अहरौरा के प्राथमिक विद्यालय सीयूर नामक गांव में छात्र एवं छात्राओं को एमडीएम में परोसे जाने वाले खाने की जगह नमक और रोटी परोसा जा रहा था जिसकी सच्चाई दिखाने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने उल्टे ही पत्रकार के ऊपर मुकदमा कायम किया था। जिसका पत्रकारों समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुरजोर तरीके से विरोध किया था जिस पर प्रशासन बैकफुट पर आते हुए पत्रकार पर हुए मुकदमे को वापस लेने पर मजबूर हुई थी।

इसी क्रम में हरेक वर्ष की भांति इस वर्ष भी कमलापति त्रिपाठी पत्रकारिता सम्मान के लिए यूपी के दो पत्रकारो का नाम चयनित हुआ, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत व पवन जायसवाल को सम्मानित किया गया। इस सम्मान से देश के तीन और पत्रकार काशी नाथ सिंह, विनोद दुआ व पुण्यप्रसुन बाजपेई भी सम्मानित किये जा चुके हैं।

पवन जायसवाल ने अपने संबोन्धन मे कहा कि पं. कमलापति त्रिपाठी कांग्रेस के न केवल नेता बल्कि अभिभावक भी रहे। बनारस के मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय फलक तक ले गए। पंडित जी कृतिजीवि पत्रकार भी रहे। पंडित जी राष्ट्र सेवा और पत्रकारिता के वक्ति उपज थे। उनकी पत्रकारिता सच्चाई, निर्भिकता और आवाम की आवाज़ थी। वे वसुल पसंद राजनेता और पत्रकार थे। वक्त के साथ समस्याएं बदल गई है। समाज को सरकारी और दरबारी पत्रकार अब पसंद नही है। आज के समय में कांग्रेस को पंडित जी जैसे नेताओं की जरुरत है, तमाम विषम परिस्थितियां आई मगर कमलापति जी ने न कभी कांग्रेस का दामन छोड़ा और न ही पार्टी को कमजोर होने दिया। आज की राजनीति में पार्टी के प्रति ईमानदारी का आभाव है इन्ही कारणों से नेताओं का खरीदफरोख्त भी होने लगा है।
पं. कमलापति त्रिपाठी एक सिद्धान्तनिष्ठ राजनेता और मूल रूप से निर्भीक, स्वतंत्र एवं ईमानदार पत्रकार एवं सम्पादक थे। उनमें मानवीय संवेदना और सिद्धान्तनिष्ठा की दृढ़ता निहित थी। वह एक उसूल पसन्द इन्सान थे। जिन्होने राजनीतिक प्रशासक के रूप में बुनियादी सिद्धान्तों से कभी समझौता नहीं किया। वह गांधी की परम्परा के पत्रकार और राजनीतिज्ञ थे जिसने आजादी से पहले और आजादी के बाद भी संघर्षों की मिसाल कायम की।

पंडित त्रिपाठी करीब 10 साल ‘आज’ से जुड़े रहे फिर उन्होंने ‘संसार’ के प्रधान संपादक की ज़िम्मेदारी संभाली। 1943 से लेकर 1952 तक वे काशी से प्रकाशित होने वाले ‘ग्रामसंसार, ‘आंधी’ और ‘युगधारा’ का संपादन करते रहे। पंडित त्रिपाठी धर्म में गहरी आस्था रहते थे, लेकिन उन्होंने कभी किसी ख़ास धर्म, जाति, समुदाय को ध्यान में रखकर लेखन नहीं किया। वे ऐसे पत्रकार थे, जो अपनी शर्तों पर कार्य करते थे और दबाव उन्हें छू भी नहीं सकता था। पत्रकारिता और राजनीति की नजदीकियां आज की तरह उस दौर में भी लोगों को प्रभावित करती थीं। कमलापति त्रिपाठी भी इस प्रभाव से खुद को अछूता नहीं रख सके। उन्होंने सियासी आंदोलनों में भाग लेना शुरू किया और धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा नाम बन गए। 1937 में वे पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने और यह सिलसिला लंबे समय तक कायम रहा। 1946, 1952, 1957, 1962 और 1969 में भी पंडित त्रिपाठी को जनता ने चुनकर विधानसभा भेजा।

अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!