ऑपरेशन दामिनी : आकाशीय बिजली के कहर को खत्म करेगी ‘दामिनी’

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)आकाशीय बिजली के कहर से हो रही मौतों से जिला प्रशासन चिंतितसोनभद्र में आकाशीय बिजली से होने वाली मौत सूबे में सर्वाधिकजिलाधिकारी के निर्देशन में आपदा अधिकारी/एडीएम की नई पहल ‘ऑपरेशन दामिनी लिंक’ ‘ऑपरेशन दामिनी लिंक’ से प्रधानों को किया जाएगा जागरूक● ‘ऑपरेशन दामिनी लिंक’ के माध्यम से प्रधान देंगे इसे जनजागरण का रूपस्मार्ट फोन रखने वाले ग्रामीणों के मोबाइल में ‘दामिनी ऐप’ डाउन लोड करवायेंगे ग्राम प्रधानसोनभद्र । उत्तर प्रदेश के कई जिले जंगल व पहाड़ों से घिरे हैं । जहां की प्राकृतिक सुंदरता व खनिज संपदा भले ही लोगों को अपनी तरफ खींच लाती हो मगर बरसात के दिनों में यही पेड़ व खनिज संपदा लोगों की जिंगदी के दुश्मन बन जाते हैं ।
बरसात के दिनों में गिरने वाली आकाशीय बिजली लोगों को जान तक ले लेती है । जनपद सोनभद्र की बात करें तो यहां आकाशीय बिजली से मौत का आंकड़ा भी काफी डरावना है, चाहे मानव जीवन की क्षति हो या फिर पशुओं की, सोनभद्र के दूरदराज के इलाकों में यह मौत का आंकड़ा प्रशासन को हमेशा से परेशान व चिंता में डाले रहता है । लेकिन अब प्रशासन के साथ दूर दराज में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है।केन्द्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने एक खास तरह का मोबाइल फोन एप्प बनाया है। इस एप्प की मदद से आकाशीय बिजली गिरने से लगभग 30-40 मिनट पहले मोबाइल फोन उपयोगकर्ता को चेतावनी मिल जाएगी, जिससे वो सुरक्षित स्थान पर जा सकेंगे। इतना ही नहीं बिजली गिरने के पहले चेतावनी और इससे बचाव की भी जानकारी ऐप से मिल सकेगी।
इस एप्प का नाम दामिनी रखा गया है ।जनपद सोनभद्र, यूँ तो यह जनपद नक्सल प्रभावित के लिए बदनाम है । चार राज्यों से घिरे जनपद सोनभद्र में जितनी मौतें नक्सल घटनाओं से नहीं हुईं उतनी अन्य कारणों से यहां के लोगों की जाने चली गयी । उन कारणों में आकाशीय बिजली भी शामिल है।जनपद सोनभद्र की बात करें तो सोनभद्र का अधिकांश इलाका जंगल और पहाड़ों से घिरा है। साथ ही यह जिला अकूत खनिज संपदा के लिए भी जाना जाता है । मगर यही खनिज संपदा लोगों के लिए मौत का कारण भी बनते रहते हैं। विशेषज्ञ मानते है कि जिस जगह पर खनिज अधिक पाए जाते है, वहाँ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना अधिक रहती है। यहीं कारण है कि प्रदेश में आकाशीय बिजली से होने वाली सर्वाधिक मौत सोनभद्र में होती है। आँकड़े बताते है कि हर साल बिजली से जहाँ लगभग 50 जनहानि होती है वहीं 250 से 300 मवेशी भी असमय काल कवलित हो जाते हैं।बरसात के दिनों में सोनभद्र में भय का माहौल रहता है। लोगों का मानना है कि बज्रपात से मौतों का एक बड़ा कारण जंगल में रहने वाले लोगो का जागरूक न होना है । इन इलाकों में रहने वाले लोगों को बिल्कुल इस बात की जानकारी नहीं होती है कि बरसात के दिनों में बिजली कड़कने के समय किस तरह का एतिहात बरतना चाहिए। इसी कारण यहाँ इंसानों के साथ-साथ मवेशियों की मौत का आंकड़ा हर साल बढ़ता ही जा रहा है।https://youtu.be/_DAsF7IT8L0इस तरह से हो रहे मौतों पर लगाम लगाने के लिए सोनभद्र के जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम ने लोगों को जागरूक करने के लिए एक मोबाइल लिंक “ऑपरेशन दामिनी” की पहल की शुरुआत की है। “ऑपरेशन दामिनी” एक ऐसा मोबाइल लिंक है जिसमें केंद्र सरकार द्वारा बताए गए निर्देश है और साथ ही इस सॉफ्टवेयर में निर्देशों को आवाज भी दी गई है ताकि आदिवासी लोग इसे सुनकर समझ सके। इसे पूरे जनपद में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए जनपद के सभी ग्राम प्रधानों को लगाया गया है ताकि यह लिंक एक जनजागरण का रूप ले सके और आकाशीय बिजली से लोग अपनी रक्षा कर सकें।
इस सॉफ्टवेयर में केंद्र सरकार द्वारा पहले से बनाये गए दामिनी ऐप के निर्देशो के साथ-साथ इन निर्देशों को आवाज भी दी गयी है ताकि जंगल मे रहने वाले कम पढ़े लिखे आदिवासी भी इसे आसानी से समझ सके। ऑपरेशन दामिनी के तहत अब सोनभद्र के सभी ग्राम प्रधान इस लिंक को अपने स्मार्ट मोबाइल में डाउनलोड करके गांव के सभी लोगो को जागरूक करेंगे ताकि आकाशीय बिजली से हो रही मौतों पर लगाम लग सके।जनपद न्यूज लाइव ने जिले के एडीएम और आपदा अधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह से खास बातचीत की।अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि “सोनभद्र में आकाशीय बिजली से मरने वालों की संख्या निश्चित तौर पर हैरान व परेशान करने वाली है मगर पिछले कुछ महीनों में हम प्रयास से इस मौत के आंकड़ों को कम कर दिया है लेकिन और भी संख्या कम करने की दिशा में काम चल रहा है जिसके लिए ‘ऑपरेशन दामिनी’ को चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रधानों को एक लिंक भेजा गया है जो सभी को डाउनलोड कराएंगे और बताएंगे कि आकाशीय बिजली के समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं।”

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