ज्ञान पर घमंड करने वाले व्यक्ति से कोसों दूर रहती है सफलता, संदेश देती है यह कहानी

कई बार व्यक्ति अपने ज्ञान के घमंड में इतना खो जाता है कि उसे अच्छे-बुरे का फर्क तक समझ नहीं आता है। यही वो समय होता है, ज्ञानी होने के बावजूद भी व्यक्ति को असफलता का मुंह देखना पड़ता है। इसके विपरीत अपने ज्ञान से दूसरों के जीवन में उजाला करने वाला व्यक्ति हमेशा लोगों के दिलों पर राज करता है। ऐसा ही कुछ संदेश देती है यह कहानी।

एक गांव में महान तलवरबाज रहा करता था। पूरा साम्राज्य उसकी महानता के गुण गाता था। तलवार के दम पर उसने आपने राजा के लिए कई लड़ाईया जीतीं। लेकिन समय पर किसका जोर चलता है लड़ाईयां बढ़ती गईं और तलवरबाज बुढ़ा होने लगा।

उसने तय किया की वो अपनी कला को व्यर्थ नहीं होने देगा और आने वाली पीढ़ी को तलवार से लड़ना सिखाएगा। कुछ ही समय में उसके पास बहुत सारे शिष्य आ गए जो तलवारबाजी सीखना चाहते थे। उसने अपनी पूरी मेहनत से अपनी तलवारबाजी के गुण अपने शिष्यों को सिखाना शुरू कर दिया।

उनके शिष्यों में एक ऐसा शिष्य था जो साधरण नहीं था। उसने बहुत जल्द ही अपने गुरु से शिक्षा प्राप्त कर ली। और धीरे–-धीरे अपनी गुरु की तरह ही एक महान तलवरबाज बन गया। लेकिन अब क्या? लोग उसे अब भी उसके गुरु के नाम से ही जानते थे जबकि उसको लगता था की वो अपने गुरु से भी अच्छा तलवरबाज है इस बात का उसे घमण्ड होने लगा, जो नहीं होना चाहिए था।

एक दिन शिष्य ने तलवारबाजी में अपने गुरु को ही चुनौती दे डाली, जिसे बूढ़े हो चुके गुरु ने स्वीकार कर लिया। मुकाबला एक सप्ताह बाद का रखा गया। शिष्य को लगा गुरु ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली है तो पक्का उसने तलवारबाजी की सारी विधियां मुझे नही सिखाईं। अब शिष्य परेशान रहने लगा और सोचने लगा ऐसी कौन सी विधि है जो उसके गुरु ने उसे नहीं सिखाई है।

अब शिष्य अपने गुरु की ताकाझांकी करने लगा ताकि गुरु अपनी उस विधि का अभ्यास करे और शिष्य उस विधि को देख ले। एक दिन गुरु एक लोहार के पास गया और उसने लोहार को 15 फुट लंबी म्यान बनाने को कहा। ये बात शिष्य ने सुन ली, उसे लगा उसका गुरु 15 फुट दूर से ही उसका सर धड़ से अलग कर देगा। वो भाग कर दूसरे लोहार के पास गया और 16 फुट लंबी तलवार बनवा लाया।

मुकाबले का दिन आ गया। दोनों तलवरबाज अपनी-अपनी तलवारें लेकर मैदान में खड़े थे। जैसे ही मुकाबला शुरू हुआ गुरु ने शिष्य के गर्दन पर तलवार रख दी और शिष्य मयान से तलवार निकलता रह गया। असल में गुरु की तलवार की केवल म्यान ही 15 फुट की थी उनकी तलवार एक साधारण तलवार थी।

इस कहानी से मिलती है यह सीख :
-जीवन में सारे युद्ध तलवार पर नहीं, अनुभव और आत्मज्ञान से भी जीते जाते हैं।
-मैं बहुत कुछ जानता हूं, या मुझे बहुत कुछ आता है, मुझसे ज्यादा कोई नहीं जान सकता और अब मुझे कौन सिखाएगा। ऐसा सोचने वाले लोग असल में सबसे कम ज्ञानी होते हैं।
-जिंदगी की पाठशाला में अनुभव और आत्मज्ञान एक ऐसा सख्त शिक्षक है जो परीक्षा पहले लेता है और सिखाता बाद में है।

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