इबादत के नियत से नहाए पानी के हर कतरे का सवाब-मुफ़्ती महमूद

रमेश यादव ( संवाददाता )

शबे बरात पर विशेष- मुल्क को कॅरोना जैसी खतरनाक बीमारी से महफूज़ रखने की खुशुशी दुआ करें

सदका-खैरात के पहले जकात अदा करना है जरूरी

दुद्धी । शबे बरात के अवसर पर दारुल उलूम कादरिया नूरिया अरबी महाविद्यालय के प्राचार्य मुफ्ती महमूद साहब ने कहा कि अल्लाह के रसूल ने फरमाया है कि जो आदमी इबादत की नियत से 15 वीं शाबान की रात नहाए तो पानी के हर कतरे के बदले सवाब पाएगा। हदीस में है कि इस मुबारक रात में अल्लाह पाक अपने नेक बंदों को दोजख से निजात बख्शता है। बेशुमार गुनाहगार बंदे जहन्नम की आजाब से बरी कर दिए जाते हैं। उन्हें अज़ाब से निजात मिल जाती है। इसलिए इस मुबारक रात को निजात की रात भी कहा जाता है। वैसे तो बुजुर्गगाने दीन ने इस रात में नफ्ली इबादतों की तालीम दी है, लेकिन याद रखने वाली बात है कि नफ्ली इबादतों का फैज उन्ही खुशनसीबों को मिलता है जिनके जिम्मे फर्ज बाकी ना हो। इसलिए अगर आप इस रात नफिल नमाज पढ़ने के का शौक रखते हों तो उसके बदले अपनी कजा नमाज अदा करके अपना फर्ज अदा करने की कोशिश करें। सदका खैरात करने की ख्वाहिश हो तो सबसे पहले बकाया जकात अदा करें। अगर आप पर जकात वाजिब नहीं है तो अल्लाह जितनी तौफीक दे आप सदका खैरात कर सकते हैं। यह रात दुआओं के लिए खास है, बल्कि खास दुआओं की रात है। इसलिए अपने गुनाहों से तौबा करें। तौबा पर कायम रहने की अपने रब से तौफीक मांगे। अपने मां-बाप वगैरा के लिए दुआ ए मगफिरत करें, और खुद अपनी भी बख्शिश की दुआ मांगे। अल्लाह ताला तौबा करने वाले बंदों को पसंद फरमाता है। तौबा कुबूल फरमा कर मर्तबा बुलंद फरमाता है। कोशिश कीजिए कि इस रात रहमत ए इलाही के बरसात की कुछ छीटें अपने दामन में भी आ सकें। तिलावत करें, दुरूद शरीफ पढ़ें और आखिर में रो-रो कर अपने, अपने मरहुमीन की गुनाहों की माफी मांगे। इसके अलवा मौजुद वक्त में कॅरोना जैसी खतरनाक बीमारी से अपना मुल्क और सभी नागरिक महफूज़ रहें, इसके लिए भी खुशुशी तौर पर दुआ कीजिये।अल्लाह की रहमत से उम्मीद है कि वह यकीनन हमारे गुनाहों को माफ फरमा देगा।



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