विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर ओबरा विधायक को सौंपा ज्ञापन

संजय केसरी/कृपा शंकर पांडेय (संवाददाता)

डाला/ओबरा। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित विघटन व निजिकरण के विरोध में रविवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक अदालत वर्मा के नेतृत्व में ओबरा विधान सभा के क्षेत्रीय विधायक संजीव कुमार गोड़ को ज्ञापन सौप तत्काल निजीकरण प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की गयी। इस दौरान ज्ञापन देने वाले कर्मचारियो ने कहा कि प्रदेश के सभी उर्जा निगमो के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजिनियर व अभियंता एक सितम्बर से लगातार शांति पूर्ण तरिके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद भी प्रबंधन का हठवादी व दमनात्मक रवैया अपनाए हुए है। जिसको लेकर कर्मचारियो में भारी आक्रोष है। निजीकरण न तो प्रदेश हित है और ना ही आम जनता के ही हित में है।कोई भी निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती है। जबकि वितरण निगम बिना भेदभाव के किसानो, गरीब उपभोक्ताओ को निर्बाध बिजली आपूर्ती कर रहा है। निजी कंपनी अधिक राजस्व देने वाले वाणिज्यिक और औधोगिक उपभोक्ताओ को प्राथमिकता पर विजली जो ग्रेटर नोएडा व आगरा में हो रहा है। निजी कंपनी लागत से कम मूल्य पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली नहीं देगी जबकि किसानो, गरीबी रेखा से नीचे और पांच सौ यूनिट प्रतिमाह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओ को पावर कार्पोरेशन घाटा उठाकर बिजली देता है। जिसके कारण ही उपभोक्ताओ को लागत से कम मूल्य पर बिजली निर्बाध मिल रही है। उ0 प्र0 में बिजली की लागत को औसत मूल्य रूपया 07.90 प्रति यूनिट है।जबकि निजी एक्ट के नियमानुसार मुनाफा लेने के बाद रूपये 09.50 प्रति युनिट से कम दर पर बिजली किसी को नहीं मिलेगी। निजीकरण के बाद किसानो को लगभग 8 हजार रूपये प्रतिमाह व घरेलू उपभोक्ताओ को 8 से 10 हजार रूपये प्रति माह तक बिजली बील देना होगा। निजीकरण फ्रेंचाईजी के जरिए निजी क्षेत्र में विद्युत वितरण सौपने का प्रयोग कभी सफल नहीं हुआ है। जिसका ताजा उदाहरण ग्रेटर नोएडा व आगरा में देखने मिल रहा है।वर्तमान में पावर कार्पोरेशन घाटा उठाकर आगरा में टोरेंट कंपनी को रूपये 04.45 प्रति युनिट पर बिजली दे रहा है।जबकि आगरा में बिजली का औसत टैरिफ रूपये 07.65 प्रति युनिट है। इस प्रकार निजीकरण से पावर कार्पोरेशन को प्रति माह अरबो-खरबो का घाटा हो रहा है। जबकि टोरेंटो कंपनी भारी मुनाफा कमा रही है। निजीकरण के बाद निगम में कार्यरत्त कर्मचारियो की सेवा शर्ते काफी प्रभावित होगीजिसके कारण भविष्य में उनका आर्थिक, समाजिक व मानसिक शोषण होने की संभावना प्रबल है।पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण न तो किसानो के हित में है और ना ही आमजन के हित में है। निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से रद्द कर सरकार प्रदेश हित व जनहित में निर्णय ले। इस अवसर पर अभय प्रताप सिंह, शशिकांत श्रीवास्तव, ओम प्रकाश पाल, शाहिद अख्तर, प्रहलाद शर्मा व गोर्पा चन्द सिंह मौजूद रहे।

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