माघी पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष हैं महत्व,जानें

माघ मास में पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि माघी पूर्णिमा पर भगवान श्रीहरि विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस पावन पर्व पर गंगाजल का स्पर्शमात्र भी स्वर्ग की प्राप्ति देता है। माघी पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। यह भी कहा जाता है कि इस अवसर पर संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व जल में भगवान श्रीहरि विष्णु का तेज रहता है।

माघी स्नान को मन एवं आत्मा को शुद्ध करने वाला माना गया है। मान्यता है कि भगवान श्रीहरि विष्णु व्रत, उपवास, दान से भी उतने प्रसन्न नहीं होते, जितना अधिक प्रसन्न माघ स्नान करने से होते हैं। इस दिन किए गए यज्ञ, तप तथा दान का विशेष महत्व है। माघ पूर्णिमा में प्रात: काल भगवान श्री मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए। काले तिलों से हवन और पितरों का तर्पण करना चाहिए। तिल दान का विशेष महत्त्व है। माघी पूर्णिमा को भगवान श्रीसत्यनारायण की कथा अति फलदायी है। मान्यता है कि इस दिन पितर देवता रूप में गंगा स्नान के लिए आते हैं, इसलिए पितरों का ध्यान करते हुए दान करना चाहिए। माघ पूर्णिमा पर गंगा में स्नान से रोग दूर होते हैं। इस दिन तिल और कंबल का दान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। व्रत के दौरान किसी पर गुस्सा न करें। घर में कलह न हो। व्रत में झूठ बोलने से बचें। माघ पूर्णिमा के दिन देर तक नहीं सोना चाहिए। भूलकर भी काले वस्‍त्र माघ पूर्णिमा के दिन नहीं पहनने चाहिए। किसी का अपमान न करें।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।


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