वजन कम करने के लिए अपने आहार में करें,फाइबर को शामिल

अपना वजन उचित मात्रा में बरकरार रखकर हृदय रोग, मधुमेह, ब्लड प्रेशर, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे से बचा जा सकता है। वजन कम करने के लिए अपने आहार में फाइबर को शामिल करना महत्वपूर्ण है। www.myUpchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. अनुराग शाही के अनुसार, फाइबर एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसको शरीर पचा नहीं सकता। हालांकि, ज्यादातर प्रकार के कार्बोहाइड्रेट्स छोटे कणों में टूट कर शुगर के कणों में परिवर्तित हो जाते हैं। फाइबर शुगर में नहीं बदलता यह बिना पचे ही शरीर से बाहर निकल जाता है। भोजन के अन्य तत्व जैसे वसा, प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट्स को हमारा शरीर तोड़कर अवशोषित कर लेता है। फाइबर को हमारा शरीर ना तोड़ पाता है और ना अवशोषित कर पाता है। यह पेट, छोटी व बड़ी आंत से गुजरते हुऐ भी वैसा ही रहता है। आपके भोजन में फाइबर की कमी हो तो कब्ज होना शरीर में फाइबर की कमी का सबसे मुख्य संकेत होता है।

हाई फाइबर फूड्स में फैट्स और कैलारी कम होते हैं। फाइबर फूड्स खाने के बाद पेट भरे होने का अहसास काफी समय तक होता है। इन्हें खाने के बाद कुछ घंटों में भूख नहीं लगती और आप अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाते हैं। फाइबर फूड्स धीरे-धीरे पचते हैं और इससे ब्लड शुगर का स्तर एकदम से नहीं बढ़ता है और स्थिर बना रहता है। सुबह के नाश्ते में हाई फाइबर फूड लेना सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब सुबह हाई फाइबर फूड लेते हैं, तो पेट लंबे समय तक भरा रहता है। दिन में बार-बार भूख नहीं लगती है।

फाइबर ऐसा पदार्थ है, जो पौधे से कार्बोहाइड्रेट के रूप में निकाला जाता है। यह दो तरह का होता है- घुलनशील और अघुलनशील। घुलने वाला फाइबर, पानी में मिल जाता है। अगर अपने आहार में इस फाइबर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह पेट में जाकर गाढ़ा तरल पदार्थ बन जाता है, जो कि शरीर द्वारा अवशोषित अनावश्यक खाने के हिस्से को रोकने में मदद करता है। यानी घुलने वाला फाइबर शरीर में कोलेस्टेरॉल बनने से रोकता है। दूसरी ओर, न घुलने वाला फाइबर लेने से पेट आसानी से साफ हो जाता है। अगर आप अपनी डाइट में फाइबर नहीं लेते हैं, तो इससे आपको कब्ज की परेशानी हो सकती है।

फाइबर में मौजूद तत्व शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करते हैं। आंतों को स्वस्थ रखने के साथ इससे भरपूर डाइट सबसे ज्यादा वजन घटाने के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन इसे लंबे समय तक लेने से हार्ट डिजीज, टाइप-2 डायबिटीज और किडनी स्टोन जैसी बीमारियों का खतरा भी टाला जा सकता है।

www.myUpchar.com से जुड़ीं डॉ. मेधावी अग्रवाल का कहना है कि फल, सब्जियां और अनाज फाइबर के मुख्य स्रोत होते हैं। फाइबर के अच्छे और प्राकृतिक स्रोत साबुत अनाज, रोटी, सेम, फल, हरी सब्जियां, अनाज और सूखे मेवे हैं। एक कप पकी दाल में करीब 15.6 ग्राम फाइबर होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी होती है। ब्रोकली में 2.4 ग्राम फाइबर, बीन्स में 10.4 ग्राम फाइबर होता है।

नियमित खानपान में स्प्राउट्स के साथ-साथ हरी पत्तेदार सब्जियां भी शामिल करें। सुबह का नाश्ता जरूर करें और इस नाश्ते में हाई फाइबर फूड जैसे ब्रॉकली, स्प्राउट्स, ओट्स, गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। फाइबर की मात्रा अपने आहार में बढ़ाने से पहले ध्यान रहे कि शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट रखना न भूलें। फाइबर आंतों में पानी को खींचता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए अपने आहार में पानी की मात्रा जरूर बढ़ाएं।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार:
वयस्कों के लिए 2,000 कैलोरी आहार पर फाइबर का डेली वैल्यू 25 ग्राम प्रति दिन है। यह संख्या उम्र या लिंग पर भी निर्भर हो सकती है। 50 से कम उम्र की महिलाओं के लिए प्रतिदिन 21 से 25 ग्राम और 50 से कम उम्र के पुरुष के लिए प्रतिदिन 30 से 38 ग्राम। 1 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रतिदिन 14 से 31 ग्राम फाइबर खाना चाहिए, जो उनकी उम्र और लिंग पर निर्भर करता है।


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