मकर संक्रांति पर्व पर पर्व विशेष

डॉ शशि कुमार पाठक एचडी (विद्यावारिधि 9473616488)

सोनभद्र|15 जनवरी बुधवार को प्रातः 7:54 मिनट पर भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे, इसलिए मकर संक्रांति खिचड़ी का प्रसिद्ध पर्व कल ही मनाया जाएगा। इसका पुण्य काल आज सूर्यास्त तक रहेगा। सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे एवं खरमास समाप्त हो जाएगा। गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक सर्वत्र गंगा नदी में स्नान कर दान करने का पूर्ण फल दायक विधान है। यह पर्व पूरे देश में विभिन्न स्वरूपों में मनाया जाता है। स्नान एवं दान का पर्व है। अतः गंगा स्नान सुलभ न हो सके तो अन्यत्र नदी सरोवर अथवा अपने घर में ही निश्चित रूप से स्नान करना चाहिए। दान करना चाहिए। खिचड़ी खाने खिलाने एवं दान करने की पुण्य फल दायक परंपरा है। मांगलिक शुभारंभ आज से हो जाएगा। सूर्य धनु राशि में परिवर्तन से विवाह, नूतन गृह प्रवेश, नया वाहन,तिर्थयात्रा, मुंडन आदि कार्य प्रारंभ किया जाएगा। आज का दिया हुआ दान अभीष्ट फल देता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य मकर राशि पर हो तो शनि की प्रिय वस्तु दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा दिखती है। तिलों से निर्मित वस्तुओं का दान से घर परिवार पर शनि की कृपा अनवरत बनी रहती है जिसके कारण कोई भी विघ्न बाधा नहीं उत्पन्न होती। दान पुण्य का यह विशेष रुप से माना जाता है। आज ही सूर्य उत्तरायण भी हो जाते हैं।

राशि विशेष से मकर संक्रांति का फल (मेष राशि में धन लाभ। वृष राशि में मान सम्मान वृद्धि। मिथुन राशि को यश एवं विजय प्राप्त होगी। कर्क राशि में खर्चा बढ़ने का योग बनाएगा। सिंह राशि में भाग्योदय होने की संभावनाएं बनेंगी। कन्या राशि में प्रॉपर्टी आदि का लाभ होने का योग बन रहा है। तुला राशि वालों के लिए विवाद की संभावनाएं बन रही। वृश्चिक राशि वालों के उच्च पद प्रतिष्ठा पर जाने की संभावनाएं दिखेंगी। धनु राशि वालों के लिए यस एवं कीर्ति में वृद्धि होगी। मकर राशि, वालों के लिए मान सम्मान में वृद्धि होगी। कुंभ राशि वालों के लिए रोग की संभावनाएं बढ़ रही हैं।मीन राशि वालों के लिए पीड़ा का संभावनाएं दिख रही है। इस दिन सूर्य भगवान का विशेष पूजन का महत्व है। इस दिन का स्नान, दान, जप, हवन आदि करने से महान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अनेक दृष्टांत इस पर्व पर मिलते हैं।

महाभारत के भीष्म पितामह ने अपने देह त्याग के लिए इसी दिन का चयन किया था। राजा भगीरथ ने भी महाराज सगर के पुत्रों का भी श्राद्ध कर्म इसी दिन किया था। सनातन धर्म में अनेक विशेषताओं का समेट मकर संक्रांति पर्व से ही सभी शुभ कार्य प्रारंभ किए जाने का योग बनता हैं। आज के ही दिन गंगा मा सागर में जाकर गिरी थी जिसके वजह से उस स्थान का विशेष महत्व है। इस पर्व को देशभर में विभिन्न समुदायों के लोग अलग-अलग रूपों और मान्यताओं के अनुसार तिल, चावल, उड़द की दाल और गुड़ का सेवन करते हैं। इन सभी सामग्रियों में सबसे ज्यादा महत्व तिल का ही होता है। इस दिन कुछ अन्य चीज भले ही न खाएं, किंतु किसी न किसी रूप में तीन भारतीय परंपरा में जरूर खाया जाता है।


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