कल्पवास का जितना हैं आध्यात्मिक महत्व उसका वैज्ञानिक महत्व भी नही हैं कम, जानिए इसके फायदे


कल्पवास का जितना आध्यात्मिक महत्व है उसका वैज्ञानिक महत्व भी कम नहीं है। भोर में उठना, पूजा-पाठ करना। दिन में दो बार स्नान और सिर्फ एक बार सात्विक भोजन के साथ बीच में फलाहार करना शरीर के लिए भी बहुत फायदेमंद है। चिकित्सकों की नजर में कल्पवास से न सिर्फ मनुष्य के शरीर का पाचन तंत्र अनुशासित होता है बल्कि खुद को स्वस्थ रखने का भी यह सबसे बेहतर माध्यम है।

माघ महीने में संगम तट पर एक माह के कल्पवास का: आध्यात्मिक रूप से बड़ा महतव है। इसलिए प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर तपस्या करते हैं। शुक्रवार को पौष पूर्णिमा के स्नानन के साथ हजारों लोगों का कल्पवास शुरू हो गया। इनमें मध्यम आयु वर्ग के लोगों के साथ बड़ी संख्या में बुजुर्ग शामिल हैं। आध्यात्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक नजरिए से भी मनुष्य के शरीर के लिए कल्पवास का बड़ा महत्व है।


आयुर्वेद, यूनानी, और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में कल्पवास का खास महत्व है। चिकित्सकों का मानना है कि कल्पवास के दौरान की दिनचर्या व खानपान से शरीर को कई बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

आयुर्वेद चिकित्सा: संयम व संतुलन देता है रोगों से मुक्ति:

आयुर्वेद में भी कल्पवास का बड़ा महत्व है। डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि इस पद्धति में इलाज के लिए पंचकर्मों की विधि में एक यह भी है। संयम और संतुलन इस चिकित्सकीय पद्धति में खास स्थान रखता है। वहीं, कल्पवास का सबसे बड़ा उद्देश्य संयम और संतुलन ही है।

एलोपैथ चिकित्सा: पेट की बीमारी से मिलती है राहत:

एलोपैथ में भी कल्पवास के अपने महत्व हैं। बेली अस्पताल के फिजीशियन डॉ. ओपी त्रिपाठी ने बताया कि नियमित व सीमित खानपान एवं कल्पवास की दिनचर्या कई तरह से लोगों के लिए फायदेमंद है। पेट की बीमारी से राहत मिलती है। मोटे लोगों का वजन कम होता है। शरीर फुर्तीला होता है। मंत्रों के जाप से खुद को सुकून मिलता है। सिर्फ बुजुर्गों को इस दौरान थोड़ा एहतियात बरतने की जरूरत होती है।

प्राकृतिक चिकित्सा: सात्विक भोजन से विचारों में निर्मलता:

प्राकृतिक चिकित्सक पद्धति की डॉ. पूजा केसरवानी ने बताया कि कल्पवास से मोटे लोगों को वजन कम करने में मदद मिलती है। शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। हानिकारक तत्वों से बचाव होता है। सुबह-सुबह मंत्रों के जाप से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं। सात्विक भोजन से विचारों में निर्मलता आती है। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में इलाज की एक थेरेपी उपवास भी है।

यूनानी चिकित्सा : बेहतर होती है रोगों से लड़ने की क्षमता:

यूनानी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर मो. आसिफ हुसैन उस्मानी ने बताया कि कल्पवास के समय खानपान नियमित व सीमित होता है। यह हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। प्रोफेसर के मुताबिक शरीर के पाचन तंत्र में होने वाले बदलाव को यह सामान्य रखता है। उसे अनुशासित बनाता है। नियमित व सीमित खानपान शरीर के अंदर विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता को और बेहतर बनाता है।


अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...