सफला एकादशी के व्रत से,कई पीढ़ियों के पाप हो जाते हैं दूर

पौष मास में कृष्ण पक्ष एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। भगवान श्रीहरि को समर्पित यह पावन व्रत मनुष्य के हर कष्ट को दूर करता है और सौभाग्य का वरदान प्रदान करता है। यह व्रत मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। विधिविधान से इस व्रत को करना चाहिए। इस एकादशी के व्रत के समान कोई दूसरा व्रत नहीं है। इस दिन भगवान श्री हरि की पूजा का विशेष महत्व है। यह एकादशी समस्त कार्यों में सफलता प्रदान कराती है। सफला एकादशी के व्रत से कई पीढ़ियों के पाप दूर हो जाते हैं।

इस व्रत में जरूरतमंदों को दान अवश्य करना चाहिए। गर्म वस्त्र और अन्न का दान करना शुभ माना जाता है। इस उपवास से आयु और स्वास्थ्य की रक्षा होती है। प्रातः एवं सायं काल श्री हरि विष्णु का पूजन करें। श्री हरि विष्णु को पंचामृत, पुष्प और ऋतु फल अर्पित करें। शाम को आहार ग्रहण करने के पहले दीपदान करें। भगवान को अर्पित किए फल को किसी रोगी व्यक्ति को दें, इसे ग्रहण करने से रोगी को स्वास्थ्य लाभ होता है। रेशम का पीला धागा श्री हरि विष्णु को अर्पित करें। जाप के बाद धागे को दाहिने हाथ में बांध लें। महिलाएं इस धागे को बाएं हाथ में बांधें। इस व्रत में रात में संकीर्तन करते हुए जागरण करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से आचरण में सात्विकता आती है। एकादशी का माहात्म्य सुनने से राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



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