निर्भया कांड : डेथ वारंट जारी करने को लेकर सुनवाई 7 जनवरी तक टली

निर्भया के दोषियों को डेथ वारंट जारी करने को लेकर दिल्ली की पटियाला हाउस में सुनवाई 7 जनवरी तक के लिए टाल दी गई है। जबकि इससे पहले दिल्ली में हुए निर्भया कांड के चार दोषियों में से एक अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका को जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली नई बेंच ने खारिज कर दिया। बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोपन्ना हैं। निर्भया बलात्कार मामले में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखने के शीर्ष अदालत के 2017 के फैसले के खिलाफ एक दोषी अक्षय कुमार सिंह ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में याचिका का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि कुछ अपराध ऐसे होते हैं जिनमें ”मानवता रोती’ है और यह मामला उन्हीं में से एक है। मेहता ने कहा, ” कई ऐसे अपराध होते हैं जहां भगवान बच्ची (पीड़िता) को ना बचाने और ऐसे दरिंदे को बनाने के लिए शर्मसार होते होंगे। ऐसे अपराधों में मौत की सजा को कम नहीं करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जो होना तय है उससे बचने के लिए निर्भया मामले के दोषी कई प्रयास कर रहे हैं और कानून को जल्द अपना काम करना चाहिए। दोषियों की ओर से पेश हुए वकील ए. पी सिंह ने अदालत से कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु और जल प्रदूषण की वजह से पहले ही लोगों की उम्र कम हो रही है और इसलिए दोषियों को मौत की सजा देने की कोई जरूरत नहीं है।

क्या होता है डेथ वारंट?

कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर-1973, यानी दंड प्रक्रिया संहिता- 1973 (CrPC) के तहत 56 फॉर्म्स होते हैं. फॉर्म नंबर 42 को डेथ वारंट कहा जाता है. इसके ऊपर ‘वारंट ऑफ एक्जेक्यूशन ऑफ अ सेंटेंस ऑफ डेथ’ लिखा होता है । वहीं इसे ब्लैक वारंट भी कहा जाता है। इसके जारी होने के बाद ही किसी व्यक्ति को फांसी दी जाती है ।

अगर निर्भया रेप और मर्डर मामले में दोषी पाए गए चारों अभियुक्तों को अदालतों या राष्ट्रपति से राहत नहीं मिलती है तो उन्हें फांसी पर लटकाने के लिए इसी फॉर्म नंबर 42 यानी ब्लैक वारंट का इस्तेमाल किया जाएगा ।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

वहीं सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुनाते हुए जस्टिस भानुमति ने कहा कि ट्रायल और जांच सही हुई है और उसमें कोई खामी नहीं है । मृत्यु दंड का सवाल है तो उसमें कोर्ट ने बचाव का पूरा मौका दिया है. जज ने कहा कि हमें याचिका में कोई ग्राउंड नहीं मिला है । इस तरह अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई ।

क्यूरेटिव पिटीशन करेंगे दायर

वहीं दोषियों के वकील ने आज क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने की बात कही है । वकील ए.पी सिंह ने बताया कि वो क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे । सिंह ने बताया कि क्यूरेटिव पिटीशन के बाद ही उनकी तरफ से दया याचिका लगाई जाएगी ।

-अब से कुछ देर में सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।

– निर्भया गैंगरेप केस: दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दोपहर 1 बजे सुनाएगा फैसला

-निर्भया केस: दोषी के वकील ने कहा कि फांसी की सजा को भारत में खत्म कर देना चाहिए। अक्षय को इस केस में झूठे तरीके से फंसाया गया है।

-निर्भया केस में दोषी अक्षय की ओर से वकील एपी सिंह ने दलील दी कि मृत्यु दंड सजा का प्राचीन तरीका है। फांसी अपराध को मारता है, अपराधी को नहीं।

– निर्भया केस: दोषी के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह केस एक ऐसा केस है, जहां अक्षय निर्दोष और गरीब आदमी है।

-निर्भया कांड के दोषी अक्षय के वकील ने मुख्य गवाह अमरिंदर पांडे पर सवाल उठाया और कहा कि मामले में उनके सबूत और प्रस्तुतियां अविश्वसनीय हैं.

-दोषी अक्षय के वकील की दलील

निर्भया कांड पर दोषी अक्षय कुमार सिंह की ओर से वकील डॉ एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पास इस मामले में कुछ नए तथ्य हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को मीडिया, जनता और राजनीतिक दवाब की वजह से दोषी ठहराया गया।

दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली नई बेंच ने सुनवाई शुरू की। बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोपन्ना हैं।

-निर्भया कांड के दोषी अक्षय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल नौ जुलाई को इस मामले के तीन दोषियों मुकेश, पवन और विनय की पुनर्विचार याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इनमें 2017 के फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं है।

सुनवाई के लिए नई बेंच गठित
दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली नई बेंच बुधवार सुबह 10:30 बजे सुनवाई की। बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोपन्ना हैं। मामले में मंगलवार (17 दिसंबर) को सुनवाई होनी थी, लेकिन चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने खुद को बेंच से अलग कर लिया। इस वजह से सुनवाई को टालना पड़ा। चीफ जस्टिस ने कहा कि उनके एक रिश्तेदार इस मामले में पीड़ित की मां की ओर से पहले पेश हो चुके हैं और ऐसी स्थिति में उचित होगा कि नई पीठ पुनर्विचार याचिका पर विचार करे।



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