एक देश में नागरिकता के दो कानून नहीं हो सकते – ओवैसी

नरेंद्र मोदी सरकार के नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के सदन में पेश होने से पहले विपक्षी दलों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। बुधवार को आल इंडिया मजलिस-ए-एत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख ने कहा कि अगर बिल में पूर्वोत्तर के राज्यों को छूट दी जा रही है तो यह आर्टिकल 14 का बड़ा उल्लंघन है।
ओवैसी ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि एक देश में नागरिकता के दो कानून नहीं हो सकते। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई और अगले हफ्ते इसे सदन में पेश किए जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि इस बिल के तहत भारत में बाहर से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। विपक्षी दलों ने इस बिल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
बुधवार को असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को लेकर मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही हैं और पूर्वोत्तर राज्यों को नागरिकता संशोधन बिल में छूट दी जा रही है तो यह अपने आप में आर्टिकल 14 का बड़ा उल्लंघन है, जो कि हमारा मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक देश में नागरिकता के दो कानून नहीं हो सकते हैं। ओवैसी ने कहा यह कानून आर्टिकल 14 और 21 दोनो का उल्लंघन करता है क्योंकि आप धर्म के आधार पर नागरिकता दे रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि अगर आप इस कानून को पारित करते हैं तो यह महात्मा गांधी और बाबा साहेब आंबेडकर दोनों संविधान शिल्पियों का अपमान होगा।



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