आज शाम बन्द होगा बदरीनाथ धाम के कपाट

सृष्टि का आठवां बैकुंठ कहलाने वाले बदरीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को कर्क लग्न में शाम करीब सवा 5 बजे बंद कर दिए जाएंगे । उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह हिन्दू धर्म के चार धामों में शुमार है ।यहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं ।

धाम से जुड़ी दिलचस्प बातें

★ बदरीनाथ धाम से जुड़ी एक मान्यता काफी लोकप्रिय है । ऐसा कहा जाता है कि ‘जो आए बदरी, वो न आए ओदरी’। इसका मतलब जो व्यक्ति बदरीनाथ के दर्शन एक बार कर लेता है उसे दोबारा माता के गर्भ में जाने की जरूरत नहीं होती ।

★ ऐसी मान्यताएं हैं कि बदरीनाथ पहले भगवान शिव का निवास स्थान हुआ करता था ।लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने इस स्थान को भगवान शिव से मांग लिया था ।

★ बदरीनाथ धाम दो पर्वतों की चोटी के बीच बसा हुआ है। इन पर्वतों को नर नारायण पर्वत कहा जाता है । भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने यहीं तपस्या की थी । ऐसा कहा जाता है कि नर का अगला जन्म अर्जुन तो नारायण का जन्म श्रीकृष्ण के रूप में हुआ ।

★ जब बदरीनाथ के कपाट खुलते हैं उस समय मंदिर में जलने वाले दीपक के दर्शन का भी खास महत्व होता है । करीब 6 महीने तक बंद दरवाजे के अंदर देवता इस दीपक को जलाए रखते हैं ।

★ बदरीनाथ के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते हैं । जब तक यह लोग रावल पद पर रहते हैं, इन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है । इन लोगों को लिए स्त्रियों का स्पर्श वर्जित माना जाता है ।

★ केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि केदारनाथ के रावल के निर्देशन में उखीमठ में पंडितों द्वारा तय की जाती है । इसमें सामान्य सुविधाओं के अलावा परंपराओं का ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि कई बार ऐसे भी मुहूर्त भी आए हैं, जिससे बदरीनाथ के कपाट केदारनाथ से पहले खोले गए हैं । जबकि आमतौर पर केदारनाथ के कपाट पहले खोले जाते हैं।



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