एनजीटी के आदेशों तक का पालन नहीं कर रहे उद्योग-स्वराज अभियान

10 नवम्बर 2019

एस प्रसाद (संवाददाता)

-फ्लोसिस प्रभावित गांव का दौरा किया स्वराज अभियान की टीम ने

-बिना सरकारी मदद के मृत्युषैया पर पड़े है प्रभावित मरीज

-मोदी सरकार के महत्वकांक्षी जिले का यह है सच

म्योरपुर। सोनभद्र में प्रदूषण की रोक थाम के लिए एनजीटी के आदेषों तक का औद्योगिक घराने व परियोजनाएं पालन नहीं कर रही है। देष के सर्वाधिक पिछड़े जिले सोनभद्र जिसे मोदी सरकार ने महत्वकांक्षी जिले में शामिल किया है वहां आज भी लोगों को शुद्ध पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। सोनभद्र का हवा, पानी सबकुछ जहरीला हो गया है। आज भी यहां लोग मलेरिया, टाइफाइड, हैजा और अकाषीय बिजली से मर रहे है। यहां की हवा और पानी में मौजूद फ्लोराइड के कारण लोगों हड्डीया टेड़ीं हो गयी है, दांत कमजोर व पीले पड़ गए है और कमर टेड़ीं हो गयी है। कई लोग बिस्तर पर पडे हुए है और मौत का इंतजार कर रहे है, जिन्हे कोई सहायता नहीं मिल रही है।

स्वराज अभियान की टीम ने फ्लोरोसिस प्रभावित रोहनिया डामर, खैराही, कुसम्हा, रासपहरी, गम्भीरपुर, डडियरा प्रभावित कई गांवों में दौरा कर प्रेस को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया। जांच टीम में स्वराज अभियान नेता दिनकर कपूर, युवा मंच के संयोजक राजेष सचान, सामाजिक कार्यकर्ता राहुल कुमार, प्रधान विश कुमार, मजदूर किसान मंच के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, कृपाशंकर पनिका, जीतू सिंह गोड़, अकेष यादव, इंद्रदेव खरवार, रमेष सिंह खरवार आदि लोग शमिल रहे।
जांच टीम को ग्रामीणों ने बताया कि उनकी यह हालत पानी और हवा में मौजूद फ्लोराइड के कारण हुई है। जांच टीम ने रासपहरी में सावित्री देवी पत्नी मनुराम, मिश्रीलाल पुत्र रामलखन, पानकुवंर पत्नी मिश्रीलाल रोहनिया दामर में जीतूराम के पुत्र अषोक कुमार, संजीव कुमार, भगू व रिंकु पुत्र बुद्धिनारायण, पनवा देवी पत्नी मथुरा प्रसाद, बासोदेवी पत्नी स्व0 सूरज धांगर, कुसमतिया देवी पत्नी भगू व किसमतिया देवी पत्नी मनोहर समेत सभी पीडित परिवारों से मुलाकात की। रासपहरी गांव में पीड़ित अधिकांष लोग खटिया पर पड़े अपनी मौत का इंतजार कर रहे है। इनमें से कई लोगों का आयुष्मान व मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना में कार्ड तक नहीं बना है। रोहनिया दामर में तो लोग सीधें चल भी नहीं पा रहे है।
प्रभावित परिवार जनों ने बताया कि उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही है। चार-पांच साल पहले बने हुए वाटर फिल्टर अब खराब हो गए है। जिन्हें फिर से ठीक भी नहीं कराया गया है।

जांच टीम ने सरकार से मांग की कि तत्काल फ्लोरोसिस से पीडित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए, उनके इलाज के लिए विषेष व्यवस्था सरकार करें, गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर हर घर में पीने का पानी दिया जाए और इस क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज दिया जाए।
जांच टीम शीध्र ही अपनी रिपोर्ट स्वराज अभियान के राष्ट्रीय नेता अखिलेन्द्र प्रताप सिंह को सौपेगी और मानवाधिकार आयोग से लेकर सरकार को पत्रक देगी। सोनभद्र के आदिवासियों, दलितों और आम नागरिक की जिदंगी की हिफाजत के लिए सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष किया जायेगा।



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