शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डालने से क्रोधित श्रृंगी ऋषि ने उन्हें श्राप दिया था

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा(संवाददाता)

चोपन। विकास खंड चोपन के सिंदुरिया गांव में बाबा दूधनाथ शिव मंदिर के प्रांगण में हनुमान प्रसाद पांडे के द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर मुख्य कथा वाचक शारदा नंदन जी महाराज के द्वारा मार्गदर्शन करते हुए कहा गया कि राजा परीक्षित के द्वारा श्रृंगी ऋषि के पिता शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सांप डालने से क्रोधित श्रृंगी ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि ऐसा कृत्य करने की सजा आपको यही है कि सात दिन के अंदर आप भी सर्प दंश से मृत हो जाएंगे।

राजा ने जब अपना मुकुट उतारा तो अपने अपराध पर प्रायश्चित करने लगे उसी समय शमीक ऋषि के शिष्य गौरमुख के द्वारा ऋषि के श्राप का वृत्तांत सुनाया गया राजा ने अपने पुत्रों जन्मेजय आदि को राज पाट सौंप कर प्रायश्चित करने के लिए लंगोट धारण करके वन को प्रस्थान कर गए। तथा गंगा के तट पर पहले से ही संत समाज एकत्रित था उनका अभिवादन करके राजा ने उन्हें सम्मान देते हुए अपने अपराध का वृत्तांत सुनाया तभी ऋषि वेदव्यास के पुत्र शुकदेव जी महाराज का वहीं पर आगमन हुआ उनसे राजा ने मृत्यु के पूर्व क्या करना चाहिए ऐसा प्रश्न किया शुकदेव जी महाराज के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण राजा को कराया गया जिससे धुंधकारी की तरह राजा परीक्षित को भी मुक्ति मिलती है।

यज्ञ के मुख्य आचार्य पंडित विजयानंद तिवारी उनके सहयोगियों उधौ देव पांडे, शिवशंकर मिश्रा,अवधनाथ मिश्रा,श्रवण देव पांडे शुभम तिवारी, अरुण कुमार शास्त्री, पूजन व संचालन आचार्य राजेश मिश्रा के द्वारा संपादित किया जा रहा है।इस मौके पर प्रेमनाथ पांडेय, महंथ पं. मुरली तिवारी, पं. विजयानंद तिवारी, रमेश मिश्रा, नरसिंह त्रिपाठी, धर्मराज सिंह बघेल, रामनरायन पांडेय, संजीव तिवारी,निर्मोल्य सिंह, विधाशंकर पांडेय, ओमप्रकाश तिवारी ओमू, जनार्दन बैसवार, परमानंद तिवारी, विशाल पांडेय सहीत भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।



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