Friday, November 15, 2019 - 09:36 PM
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बैंकॉक के निमिबुत्र स्टेडियम में ‘स्वास्दी मोदी’ कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने का जिक्र किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के ह्यूस्टन में हुए ‘हाउडी मोदी’ के तर्ज पर शनिवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के निमिबुत्र स्टेडियम में ‘स्वास्दी मोदी’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों को बताते हुए आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने का खास अंदाज में जिक्र किया। भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने थाईलैंड के साथ भारत के हजारों साल के ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया।
इसके अलावा उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया और कहा कि भारत की पिछली 5 साल की उपलब्धियों से दुनियाभर में भारतीय मूल के लोग गर्व कर रहे हैं। अब दुनियाभर में भारतीय मूल के लोग गर्व से बताते हैं कि हम भारतीय मूल के हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल बाद भारत में कोई सरकार 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद उससे भी ज्यादा बहुमत से सत्ता में आई है। प्रधानमंत्री ने भारतवासियों को छठ पर्व की भी बधाई और शुभकामनाएं दीं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड की 3 दिन की यात्रा पर बैंकॉक पहुंचे हैं। वह रविवार को आसियान की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वह कई द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि थाईलैंड की यह मेरी पहली ऑफिशल यात्रा है। 3 साल पहले थाईलैंड के नरेश के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देने आया था। आज मौजूदा नरेश और प्रधानमंत्री के न्योते पर मैं यहां आसियान समिट में भाग लेने आया हूं। मैं संपूर्ण राजपरिवार और थाई मित्रों को भारत के 1.3 अरब लोगों की ओर से अपनी शुभकामनाएं देता हूं। थाईलैंड के राजपरिवार का भारत के प्रति लगाव हमारे घनिष्ठ और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। राजकुमारी थमिचक्रम स्वयं संस्कृत भाषा की विद्वान हैं। उन्हें पद्मभूषण और संस्कृत सम्मान से भारत ने उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।

हमारे रिश्तों में इतनी आत्मीयता आई कैसे, हमारे बीच संपर्क और संबंध की इस गहराई का कारण क्या है, यह आपसी विश्वास, यह घुलमिलकर रहना, ये आए कहां से? इन सवालों का एक सीधा सा जवाब है। दरअसल हमारे रिश्ते सिर्फ सरकारों के बीच नहीं है और न ही किसी एक सरकार को इन रिश्तों के लिए कहा जाए कि उनके समय यह हुआ। बल्कि इतिहास की हर तारीख ने, हर घटना ने हमारे संबंधों को विकसित किया है, गहरा किया है और नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। ये रिश्ते दिल के हैं, आत्मा के हैं, आध्यात्म के हैं। भारत का नाम पौराणिक काल के जम्बू द्वीप से जुड़ा है थाईलैंड स्वर्णभूमि का हिस्सा था। यह जुड़ाव हजारों साल पुराना है। भारत के दक्षिण, पूर्वी और पश्चिमी तट हजारों साल दक्षिण-पूर्वी एशिया के साथ समंदर के जरिए जुड़े। इन्हीं रास्तों के जरिए समुद्री व्यापार हुआ, इन्हीं रास्तों से लोग आए-गए और इन्हीं के जरिए हमारे पूर्वजों ने कला और दर्शन, ज्ञान और विज्ञान, कला और संगीत, भाषा और साहित्य को साझा की।

भगवान राम की मर्यादा और भगवान बुद्ध की करुणा, ये दोनों हमारी साझी विरासत हैं। करोड़ों भारतीयों का जीवन जहां रामायण से प्रेरित होता है, वहीं थाईलैंड में रामाकियन की है। भारत की अयोध्या नगरी थाईलैंड में अथुख्या हो जाती है। गरुड़ के प्रति थाईलैंड में अटूट श्रद्धा है। हम भाषा ही नहीं, भावना के स्तर पर भी एक दूसरे के बहुत नजदीक हैं।
स्वास्दी का संबंध संस्कृत के स्वस्ति से है यानी कल्याण। यानी आपका कल्याण हो, अभिवादन हो। हमें हर तरफ अपने नजदीकी संबंधों के गहरे निशान मिलते हैं।
पिछले 5 सालों में मुझे दुनिया के कई देशों में जाने का मौका मिला। भारतीय समुदाय से मिलने की कोशिश मैं करता रहता हूं। और आज भी आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए, मैं आपका बहुत आभारी हूं। लेकिन जब भी ऐसी मुलाकात हुई है, हर एक में मैंने देखा कि भारतीय समुदाय में भारत और उनके मेजबान देश का अद्भुत संगम नजर आता है। आप जहां भी रहते हैं आपके भीतर भारत रहता है, भारतीय सभ्यता और मूल्य की झलक दिखती है। जब दुनिया के नेता भारतीय समुदाय की तारीफ करते हैं तो मुझे गर्व होता है। वे आपके मेलजोल और शांति से रहने की प्रवृत्ति के कायल नजर आते हैं। पूरे विश्व में भारतीय समुदाय के लोगों की छवि हर हिंदुस्तानी और पूरे भारत के लिए बहुत गर्व की बात है। इसके लिए दुनियाभर में फैले हुए आप सभी बंधु बधाई के पात्र हैं।

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