Friday, November 15, 2019 - 09:42 PM
हेल्थ

आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियाँ व लक्षण और क्या हैं इलाज,जानें

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जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर के अनुसार, भारत में लगभग 20 करोड़ लोगों में आयोडीन की कमी से होने वाले विकार (आईडीडी) का खतरा है। इनके अलावा 7.1 करोड़ लोग गॉइटर (गलगंड) और अन्य आईडीडी से पीड़ित हैं। दुनिया भर में यह आंकड़ा 2 अरब है। आईडीडी किसी को भी अपना शिकार बना सकता है, लेकिन 6 से 12 आयु वर्ग के बच्चे-किशोर सबसे ज्यादा प्रभावित रहते हैं। आईडीडी का सबसे बुरा असर जीवन के पहले 1000 दिनों में और गर्भाधान से 2 वर्ष की आयु तक होता है।
आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियां:
यदि समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो आयोडीन की कमी से हार्ट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं जैसे- हार्ट का बढ़ा हुआ आकार और हार्ट फेल होना। वहीं इसकी कमी से महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या हो सकती हैं, जैसे-अवसाद और बांझपन। आयोडीन की कमी वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना 46 फीसदी कम होती है। गर्भवती महिलाओं में थायराइड हार्मोन की कमी का असर बच्चे पर पड़ता है। नवजात जन्म से कमजोर होगा। वहीं गर्भपात, मृत बच्चों का जन्म और जन्म से ही होने वाली असामान्यताओं का जोखिम बढ़ जाता है।
शरीर को आयोडीन की जरूरत:
आयोडीन एक पोषक तत्व है, जो शरीर में थायरॉयड नामक रसायन बनाने के लिए आवश्यक होता है। थायरॉइड ही शरीर के समग्र विकास को नियंत्रित करता है। श्वास लेने और हृदय गति से लेकर शरीर के वजन और मांसपेशियों की शक्ति तक, सब कुछ बेहतर कार्य करे यह आयोडीन पर निर्भर करता है। जब आयोडीन का स्तर बहुत कम होता है, तो नींद आने लगती है। मरीज ध्यान लगाकर काम नहीं कर पाता है। जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द के साथ डिप्रेशन होने लगता है। कुल मिलाकर भले ही आयोडीन बहुत थोड़ी मात्रा में जरूरी हो, लेकिन इसकी कमी शरीर को बड़ा नुकसान पहुंचाती है। वयस्कों को आमतौर पर प्रति दिन 150 माइक्रोग्राम (एमसीजी) आयोडीन की आवश्यकता होती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रति दिन 200 एमसीजी जरूरी है।
myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. अनुराग शाही के अनुसार, ‘हमारे शरीर में आयोडीन का निर्माण नहीं होता, यानी हमें आहार के रूप में ही इसे शरीर में पहुंचाना होता है। आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि का आकार असाधारण रूप से बढ़ जाता है।’ अन्य खाद्य पदार्थों के साथ आयोडीन युक्त नमक इसका विकल्प है, लेकिन राजस्थान, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसके सेवन की मात्रा देश में सबसे कम है। इंडिया आयोडीन सर्वे 2018-19 के अनुसार, ‘भारत में 85.6 फीसदी लोगों को आयोडीनयुक्त नमक के बारे में जानकारी है और 74.6 फीसदी यह जानते हैं कि इसकी कमी से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं।’ यही कारण है कि हर वर्ष 21 अक्टूबर को आयोडीन डेफिशिएंसी डे के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों को जागरूक बनाया जा सके।
आयोडीन की कमी के लक्षण:
डॉ. अनुराग शाही के अनुसार, गर्दन में सूजन, अचानक वजन बढ़ना, कमजोरी या थकान महसूस होना, बालों का झड़ना या कम होना, याददाश्त कमजोर होना, गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं, मासिक धर्म की अनियमितता या मासिक धर्म में अधिक खून आना आयोडीन की कमी के सामान्य लक्षण हैं। इसके अलावा सूखी और परतदार त्वचा, सामान्य से अधिक ठंड लगना और असामान्य धड़कन भी इसकी कमी के संकेत हैं। बच्चों में आयोडीन की कमी मानसिक विकलांगता का कारण बन सकती है। दांतों का विकास नहीं होता, मानसिक विकास रुक जाता है, बच्चा मंदबुद्धि की तरह बर्ताव करता है।
आयोडीन की कमी का पता लगाने के टेस्ट:
यूरिन या ब्लड टेस्ट से आयोडीन की कमी का पता लगाया जा सकता है। आयोडीन पैच टेस्ट भी होता है, जिसमें डॉक्टर त्वचा पर आयोडीन के एक पैच पेंट करते हैं और जांचते हैं कि 24 घंटे के बाद यह कैसा दिखता है।
ऐसे दूर करें आयोडीन की कमी:
मछली, अंडे, मेवे, मीट, ब्रेड, डेयरी उत्पाद और समुद्री शैवाल, कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें प्रचूर आयोडीन होता है। यदि आहार से पर्याप्त आयोडीन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, तो डॉक्टर इसके सप्लिमेंट की सलाह देते हैं। आयोडीन नमक इसका एक तरीका है। लेकिन ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में आयोडीन नमक का सबसे कम इस्तेमाल होता है। यहां महज 65.5 फीसदी घरों में ही आयोडीन युक्त नमक खाया जाता है। इसके बाद तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश हैं। यानी इन राज्यों को आयोडीन की कमी से बचाना है तो आयोडीन युक्त नमक का सेवन बढ़ाना होगा।
भारत में नेशनल आयोडीन डिफिशन्सी डिसऑर्डर कंट्रोल प्रोग्राम (एनआईडीडीसीपी) लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य है – आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों को रोकना, नियंत्रित करना और जड़ से खत्म करना। इस प्रोग्राम के तहत आयोडीन युक्त नमक की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आईडीडी सेल और आईडीडी निगरानी प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।

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