सोनभद्र में विकलांगता का मुद्दा गरमाया, मानवाधिकार संगठन द टेम्पल आफ ह्यूमन डिग्निटी ने लिखा पत्र

नवल बाजपेयी (संवाददाता)

देश में शुद्ध पानी मुहैया को लेकर सरकार तमाम दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत क्या है यह सोनभद्र के लगभग 269 गांवों पर देखा जा सकता है जहां शुद्ध पानी को लेकर लोग वर्षों गुजार दिए, या फिर यूं कहें कि एक पीढ़ी बीत गयी । लेकिन ग्रामीणों को शुद्ध जल नसीब नहीं हुआ । आलम यह है कि इन गांवों में फ्लोरोसिस नामक बीमारी से लोग ग्रसित हो गए । फ्लोरोसिस की वजह से लोगों के हाथ-पांव टेढ़े हो जा रहे हैं और इतना ही नहीं बच्चों के दांत भी टेढ़े व पीले हो रहे हैं ।

सरकारें लगातार वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से लोगों को पानी मुहैया करा रहा है लेकिन वह न तो पर्याप्त है और न स्थायी व्यवस्था ।

इसी समस्या को लेकर मानवाधिकार संगठन द टेम्पल आफ ह्यूमन डिग्निटी ने मानवाधिकार आयोग के अलावा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री व सम्बंधित विभाग को पत्र लिखकर यह मांग की है कि लोगों को शुद्ध पानी देने के साथ प्रभावित क्षेत्रों के विषय में स्थायी व्यवस्था बनाये ।

मानवाधिकार संगठन के बंटी श्रीवास्तव ने कहा कि लोगों को शुद्ध पानी, हवा देना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है । ऐसे में यदि सरकार नहीं दे पा रही है तो यह गंभीर विषय है । उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द इस विषय पर गंभीर हल निकालें । उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि मानवाधिकार आयोग इसे गंभीरता से लेगा और पीड़ित ग्रामीणों को उसका अधिकार जरूर वापस दिलाएगा। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संगठन ही है जो ऐसे अधिकारों की लड़ाई लड़ता है और उसे न्याय दिलाता है ।



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