सुप्रीम के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा – आज हम मामले की सुनवाई खत्म करके ही उठेंगे

सुप्रीम कोर्ट में पिछले 40 दिनों से लगातार अयोध्या मामले पर सुनवाई चल रही है । आज इस मामले पर सुनवाई का आखिरी दिन है । सुप्रीम के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने साफ कह दिया है कि इस मामले की सुनवाई आज शाम 5 बजे तक पूरी हो जाएगी । अब बहुत हो गया । आज हम मामले की सुनवाई खत्म करके ही उठेंगे । ये मामला पिछले 70 सालों से विवाद का कारण रहा है । अब इस मामले में जल्द फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है. जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ है?

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विवाद पर मध्यस्थता का रास्ता निकाला । लेकिन मध्यस्थता का कोई नतीजा नहीं निकला । इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि इस मामले की 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई होगी । कोर्ट ने कहा कि सुनवाई तबतक चलेगी, जबतक मामले का निपटारा नहीं हो जाता । फिलहाल चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ मामले पर रोजाना सुनवाई कर रही है । पीठ के सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए नजीर शामिल हैं ।

साल 1949 में विवादित ढांचे में रामलल्ला की मूर्ति अचानक प्रकट हुई । इस पर हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच विवाद हुआ । जिसके बाद मुसलमानों से एफआईआर दर्ज कराई कि यह मूर्तियां बाहर से लाकर रखी गई हैं । निचली अदालत ने वहां ताला लगा दिया । इसके दस साल बाद निर्मोही अखाड़े ने विवादित ढांचे पर अपना मालिकाना हक जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया । फिर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपना हक जताया । कोर्ट ने यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिए । 1986 तक स्थिति बनी रही फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ताला खुलवा दिया ।

दूसरा मोड़ 1989 में आया जब राजीव गांधी सरकार ने ही शिलान्यास की अनुमति दी । सबसे अहम फैसला 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया । कोर्ट ने विवाद को सुलझाने के लिए एक बीच का रास्ता निकाला, लेकिन उस फैसले के बाद भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था. राम मूर्ति वाला हिस्सा रामलला विराजमान को, राम चबूतरा और सीता रसोई का हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का आदेश दिया था । बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया । सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है ।



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