अयोध्या कज़ की सुनवाई अंतिम दौर में, 72 घण्टे से भी कम समय शेष

अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई खत्म होने में अब 72 घंटे से भी कम का वक्त बचा है। सोमवार को अदालत में मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें रखी गईं, अब मंगलवार को हिंदू पक्ष अपनी अंतिम दलीलें शुरू करेगा । मंगलवार को इस मसले की सुनवाई का 39वां दिन है । मध्यस्थता की तमाम कोशिशों के असफल होने के बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले की रोजना सुनवाई का फैसला किया था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों की संविधान पीठ ने पिछले 38 दिनों से लगातार इस मामले की सुनवाई कर रहा है। माना जा रहा है कि नवम्बर के दूसरे हफ्ते में इस मामले में देश की सर्वोच्च अदालत अपना निर्णय सुना सकती है। संभावित फैसले से पहले अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कोर्ट में हिंदू और मुस्लिम पक्ष अपने-अपने पक्ष में तगड़ी दलीलें रख रहे हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों से 17 अक्टूबर तक अपनी बहस पूरी करने का आदेश दिया है।

सोमवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने अदालत में कहा कि उन्हें लगता है कि अदालत सिर्फ उनसे ही सवाल पूछ रही है, हिंदू पक्ष की ओर कोई सवाल नहीं उठ रहा है. हालांकि, अदालत ने उनके इस सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की थी. साथ ही मुस्लिम पक्ष ने कहा कि श्रद्धा-स्कन्द पुराण के आधार पर जमीन पर कब्जा नहीं मिलता है, ऐसे में अयोध्या की ज़मीन को मुस्लिम पक्ष को ही सौंपा जाए.

अदालत की ओर से सोमवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूकी को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया गया । सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कहा है ।

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई

इलाहाबाद कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को विवादित 2.77 एकड़ जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ 14 याचिकाएं दायर की गईं थीं। शीर्ष अदालत ने मई 2011 में हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के साथ विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। अब इन 14 अपीलों पर लगातार सुनवाई हो रही है।

कौन कर रहा है अयोध्या मामले की सुनवाई?

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा इस मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ में जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए नज़ीर भी शामिल हैं । मध्यस्थता की कोशिशें असफल होने के बाद से 6 अगस्त को इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई थी, तब से लेकर अबतक हफ्ते में पांच दिन इस मसले की सुनवाई हो रही है ।



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