Wednesday, October 23, 2019 - 01:33 PM
- पीलीभीत

प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन को दे रही बढ़ावा

17

9 अक्टूबर 2019
दीनदयाल शास्त्री ब्यूरो

पीलीभीत । सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। सूर्य की ऊर्जा का उपयोग कर बड़ी मात्रा में विद्युत उत्पादन किया जा सकता है। आज विद्युत की मांग गांव के हर घर से लेकर शहरों तक है। विद्युत की अपेक्षित मांग के अनुरूप उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी किया जाना आवश्यक है और सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन कर मांग की आपूर्ति पूरी की जा सकती है।
विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन करने पर विशेष बल दिया है।
प्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन में निजी भागीदारी को बढ़ावा एवं निजी निवेश को आकर्षित किये जाने के उद्देश्य से सौर ऊर्जा नीति-2017 घोषित की है। इस नीति के अन्तर्गत वर्ष 2022 तक 10700 मेगावाट क्षमता की सौर विद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नीति में आॅनलाइन सिंगल विण्डो क्लियरेंस की व्यवस्था, सोलर पावर परियोजनाओं की स्थापना हेतु भूमि पर 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी में छूट, इलेक्ट्रिीसिटी ड्यूटी में 10 वर्षों के लिए शत-प्रतिशत छूट, सोलर पावर परियोजनाओं हेतु पर्यावरण क्लियरेंस लिये जाने की छूट एवं थर्ड पार्टी को पावर सेल, जिसमें पावर सेल पर इन्ट्रा-स्टेट में व्हीलिंग एवं ट्रान्समिशन चार्जेज पर 50 प्रतिशत तथा इन्टर-स्टेट पर 100 प्रतिशत छूट दिये जाने का प्राविधान है।
सरकार ने प्रदेश के बुन्देलखण्ड एवं पूर्वान्चल क्षेत्रों में स्थापना हेतु 05 मेगावाट तथा उससे अधिक क्षमता की सोलर पावर परियोजनाओं के ग्रिड संयोजन हेतु एक निश्चित दूरी तक पारेषण लाइन पर आने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किये जाने का प्राविधान किया है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सौर विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा दिये जाने के उद्देश्य से 4000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के लिये ग्रीन एनर्जी काॅरीडोर का निर्माण कराये जाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में अब तक कुल 894 मेगावाट क्षमता की यूटिलिटी स्केल सौर विद्युत परियोजनाएं अधिष्ठापित की गयी है।
वही विगत दो वर्षों में कुल 615 मेगावाट क्षमता की यूटिलिटी स्केल सौर विद्युत परियोजनाएं अधिष्ठापित की गयी है। वर्तमान वर्ष में सौर ऊर्जा नीति-2017 के अन्तर्गत 1050 मेगावाट क्षमता की सौर पावर परियोजनाओं की स्थापना हेतु बिडिंग के माध्यम से आवंटन किया जा चुका है।
सौर ऊर्जा नीति-2017 के अन्तर्गत कैपिटिव उपयोगार्थ अथवा तृतीय पार्टी विक्रय हेतु ओपेन एक्सेस के अन्तर्गत सौर पावर परियोजना स्थापना की नीति मेें उपलब्ध प्राविधानुसार 485 मेगावाट क्षमता की सौर पावर परियोजनाओं की स्थापना का आवंटन किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा ग्रिड संयोजित सोलर रूफटाॅप परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ग्रिड संयोजित रूफटाप सोलर पावर प्लान्ट की स्थापना पर केन्द्रीय अनुदान के अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 15 हजार प्रति किलोवाट अधिकतम 30 हजार रुपये प्रति उपभोक्ता हेतु राज्य अनुदान का प्राविधान किया गया है। प्रदेश में 187.16 मेगावाट क्षमता की रूफटाप सोलर पावर प्लाण्टों की स्थापना की गयी है।
प्रदेश में जैव अपशिष्टों से जैव ऊर्जा के उत्पादन को प्रोत्साहित किये जाने के उद्देश्य से फरवरी, 2018 में नीति जारी की गयी है, जिसके अन्तर्गत बायो डीजल, बायो एथेनाल, मेथेनाल, बायोगेस, बायो सीएनजी, प्राड्यूसर गैस, बायो कोल की उत्पादन इकाईयों की स्थापना करायी जा रही है। इन उद्यमों को प्रोत्साहित किये जाने हेतु राज्य सरकार द्वारा निवेश के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही 10 वर्षों तक एस-जीएसटी की प्रतिपूर्ति तथा भूमि क्रय पर स्टाम्प ड्यूटी में शत-प्रतिशत छूट प्रदान की जा रही है। नीति के अन्तर्गत जैव ऊर्जा की 12 परियोजनाओं में कुल 2480 करोड़ रुपये निवेश की स्वीकृति प्रदान की गयी है।

अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...