रामलीला- लक्ष्मण को शक्ति बाण लगते ही रामा दल में मची हाहाकार

धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)

विंढमगंज। स्थानीय राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली में चल रहे श्रीरामलीला के विगत 62 वर्ष के अनवरत हो रहे मंचन की छाप छोड़ी। आपको बता दें कि इसी गांव की मिट्टी में जन्मे जो देश तथा प्रदेश में उपलब्धियां हासिल की है वे इस मंच पर अभिनय कर चुके है। बारहवें दिन लक्ष्मण शक्ति,कुम्भकर्ण बद्ध,आदि सुंदर प्रसंगों के सुंदर मंचन से दर्शक भाव बिभोर हो उठे।रामलीला के क्रम में राम तथा रावण की सेना में युद्ध प्रारम्भ हो जाती है।इसी बीच मेघनाथ लक्ष्मण पर शक्ति बाण से प्रहार करते हैं जिससे लक्ष्मण मुर्क्षित हो कर युद्ध भूमि में गिर पड़ते हैं।

जिससे श्रीराम के सेना में हाहाकार मच जाती है।तब भिभिषण बताते हैं कि लंका में सुषैन नाम का एक बैध है।हनुमान सुषैन बैध को के आते है।बैध के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी लेने हिमालय पर्वत पर चले जाते हैं।इसी बीच रावण कालनेमी नामक राक्षस को हनुमान को पथ में रोकने को भेजते है।हनुमान उसे पहचान जाते हैं और उसका बद्ध कर देते हैं।उधर संजीवनी बूटी पहचान में नही आने पर हनुमान पूरा पर्वत ही उठा लाते हैं।

लौटते वक्त अयोध्या के ऊपर से उड़ते वक्त भरत के बाण से हनुमान मुर्क्षित हो जमीन पर गिर पड़ते हैं और उनके मुख से राम-राम निकलता है।यह सुनकर भरत हैरत में पड़ जाते हैं और अफ़सोस करते हैं कि यह हमसे कैसा अनर्थ हो गया।पुनः हनुमान बूटी लेकर उड़ते हैं।संजीवनी बूटी के कारण लक्ष्मण की मुरक्षा दूर हो जाती है।इसी बीच कमेटी द्वारा स्वागत के क्रम में आये मेहमान डा लवकुश प्रजापति,रामेश्वर राय इत्यादि लोगों का अंगवत्रम से स्वागत किया गया।इस अवसर पर रामलीला के समस्त पदाधिकारी मौजूद रहे।



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