Wednesday, October 23, 2019 - 01:59 PM
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देश में जो नई आशा जगी है वो बदलाव का प्रतीक है – मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजयदशमी के मौके पर मंगलवार को अपना स्थापना दिवस मनाया । इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में शस्त्र पूजा की । फिर स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया । स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र किया । भागवत ने कहा कि लिंचिंग जैसी घटनाओं से संघ का कोई लेना-देना नहीं है ।

मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर मोहन भागवत ने कहा, ‘भीड़ हत्या (लिंचिंग) पश्चिमी तरीका है और देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

भागवत ने कहा, ‘ऐसी घटनाओं को रोकना हर किसी की जिम्मेदारी है । कानून व्यवस्था की सीमा का उल्लंघन कर हिंसा की प्रवृत्ति समाज में परस्पर संबंधों को नष्ट कर अपना प्रताप दिखाती है । यह प्रवृत्ति हमारे देश की परंपरा नहीं है, न ही हमारे संविधान में यह है । कितना भी मतभेद हो, कानून और संविधान की मर्यादा में रहें. न्याय व्यवस्था में चलना पड़ेगा ।

कार्यक्रम में भागवत ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि बहुत दिनों बाद देश में कुछ अच्छा हो रहा है । देश की सुरक्षा पहले से ज्यादा बढ़ी है। वहीं, जम्मू-कश्मीर का जिक्र करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश में एक ऐसी सरकार है जिसने कठोर फैसले किए है। अनुच्छेद 370 उसका उदाहरण है। यह सरकार समाज के उन सभी वर्गों के लिए काम कर रही है। देश में जो नई आशा जगी है वो बदलाव का प्रतीक है। कुछ फैसलों से कुछ लोगों को परेशानी हुई है और वो मुमकिन है। लेकिन वो यह कहना चाहते हैं कि सरकार के फैसले उन लोगों को पसंद नहीं है जो बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

इस दौरान संघ प्रमुख ने अन्य राजनीतिक दलों पर निशाना भी साधा । उन्होंने कहा कि देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है । लेकिन, अफसोस कि कुछ लोगों को ये बदलाव पसंद नहीं आ रहा।

मोहन भागवत ने इस बीच देश की मौजूदा आर्थिक हालत पर भी बात की । उन्होंने बताया, ‘मेरे एक मित्र अर्थशास्त्र के जानकार हैं. उन्होंने कहा कि मंदी का दौर उसे कहते हैं, जब आपकी विकास दर जीरो हो जाए ।लेकिन, हमारी जीडीपी दर तो 5 फीसदी है । हमें अभी क्या फिक्र है । हमें जीडीपी पर चर्चा तो करनी चाहिए, मगर चिंता नहीं. सरकार इस दौर से उबरने के लिए कई कोशिशें कर रही हैं ।

1925 में हुई थी आरएसएस की स्थापना
बता दें कि 27 सितंबर 1925 को दशहरे के दिन मुंबई के मोहिते के बाड़े नाम की जगह पर डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी थी । आरएसएस की ये पहली शाखा थी. इसमें सिर्फ 5 स्वयंसेवक थे ।

स्थापना दिवस पर संघ अपना इंटरनेट आधारित रेडियो चैनल भी लेकर आया है, जिसपर कार्यक्रम में भागवत के संबोधन का प्रसारण किया जाएगा।। इस वार्षिक समारोह में एचसीएल के संस्थापक शिव नादर मुख्य अतिथि हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इस सामारोह में मौजूद रहे ।

पूरा देश विजयदशमी को धूमधाम से मना रहा है। इस मौके पर आरएसएस ने नागपुर में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया है जिसमें शामिल होने के लिए नितिन गड़करी, वी के सिंह और एचसीएल के संस्थापक शिव नाडार भी पहुंचे। इस खास मौके पर अलग अलग संगठनों के लोग भी शिरकत कर रहे हैं। नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 2014 और 2019 के चुनावी नतीजों में बुनियादी फर्क है। उन्होंने कहा कि 2014 में जनादेश पिछली सरकार के खिलाफ था। लेकिन 2019 का नतीजा पिछले पांच वर्षों के बेहतर फैसलों का परिणाम है।

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