Wednesday, October 23, 2019 - 01:15 PM
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स्विस बैंक में जमा काले धन के खाताधारकों की सूची भारत को मिली

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स्विस बैंक में काले धन को लेकर भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। स्विट्जरलैंड ने भारतीय नागरिकों के खाते के बारे में जानकारियों की पहली खेप केंद्र सरकार को सौंप दी है । दोनों देशों के बीच हुए ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन फ्रेमवर्क
(AEOI) के तहत यह संभव हो सका है ।

विशेष फ्रेमवर्क के तहत भारत को मिली जानकारी
स्विट्जरलैंड के बैंकों द्वारा भारतीय नागरिकों की खाते संबंधी जानकारियों को भारत के साथ साझा करना देश में काले धन से लड़ाई को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है । बता दें कि भारत उन 75 देशों की लिस्ट में शामिल है जिनसे स्विट्जरलैंड फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन ग्लोबल फ्रेमवर्क के आधार पर खाता संबंधी वित्तीय जानकारी साझा कर रहा है ।

गौरतलब है कि यह ऐसा पहला मामला है जब ग्लोबल फ्रेमवर्क AEOI के तहत भारत को स्विट्जरलैंड से कालेधन संबंधी जानकारी मिली है । इस फ्रेमवर्क के तहत स्विस बैंकों के उन सभी खातों की वित्तीय जानकारी भारत को मिलेगी, जो कि मौजूदा समय में हैं या फिर जिन्हें साल 2018 में बंद कर दिया गया था ।हालांकि, इस बार स्विस बैंकों द्वारा साझा की गई इन जानकारियों को पहले ही सरकार की कार्रवाई के डर से व्यक्तिगत तौर पर साझा कर दिया गया था। बैंकर्स और रेग्युलेटर्स का मानना है कि भारत को मिली इन जानकारियों से उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी, जिन्होंने अवैध तरीकों से विदेश में पैसा जमा कर रखा है ।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भारत को साझा की गई इन जानकारियों में इस बात का भी जिक्र है कि इन खाते में कहां से फंड आया है और कहां ट्रांसफर किया गया है । अगर कोई खाता साल 2018 में एक दिन के लिए भी ऑपरेशनल रहा है तो भी इसके बारे में जानकारी दी गई है। ऐसें किसी खाते में डिपॉजिट्स, ट्रांसफर, सिक्योरिटीज में निवेश समेत सभी जानकारियां हैं । 100 पुराने खातों के बारे में भी जानकारी भारत को इन खातों संबंधी वित्तीय जानकारियों की अगली खेप सितंबर 2020 में सौंपी जाएगी । न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पहली खेप में अधिकतर जानकारियां कारोबारियों, एनआरआई लोगों के बारे में है. इनमें से अधिकतर एनआरआई दक्षिण-पूर्व एशिया, अमरीका, यूनाइटेड किंगडम और अफ्रीकी देशों में रहते हैं । प्राप्त जानकारी में यह भी कहा गया है कि कालेधन के खिलाफ मुहिम चलने के बाद इन खातों से बड़े स्तर पर पैसे निकाले गए हैं । कई मामलों में तो खातों को बंद ही कर दिया गया । इसके अलावा कम से कम 100 पुराने खातों के बारे में भी जानकारी, जिसे 2018 के पहले ही बंद कर दिया गया था।

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