नवें दिन माँ सिद्धिदात्रि के पूजन-हवन के साथ भंडारे का हुआ आयोजन

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

विंढमगंज । स्थानीय थाना क्षेत्र के महुली कस्बे सहित ग्रामीण अंचलों में चल रहे नवरात्र के नवें दिन क्षेत्र के बिभिन्न प्रमुख स्थानों पर पंडालों में मातारानी की नवें स्वरूप के पूजन के बाद हवन का कार्यक्रम हुआ।पावन माह नवरात्र के नवें दिन मातारानी के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा अर्चना की गयी।मातारानी का यह महालक्ष्मी का ही स्वरूप है। क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में रेलवे स्टेशन स्थित श्री शंकर झंकार नाट्य कला मंच पर स्थित प्रतिमा,पतरिहा स्थित शिव मंदिर परिसर,हिराचक स्थित यज्ञ स्थल पर,फुलवार स्थित चौक इत्यादि स्थानों पर माता रानी की प्रतिमा की पूजन अर्चन के बाद सर्वप्रथम नौं कन्याओं को भोजन कराकर भंडारे की सुरुआत की। श्री शंकर झंकार नाट्य कला समिति द्वारा विशाल दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया।इस अवसर पर विविकेकानंद, धर्मेन्द्र मिश्रा, चंद्र प्रकाश प्रजापति, अरविन्द कुमार, मानिक चंद, अंकित कुमार, बिहारी जायसवाल, मनोज, संजय जायसवाल इत्यादि सहित सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।

क्या है मान्यता

माँ सिद्धिदात्रि की पूजा नौंवे दिन की जाती है। ये देवी सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। उपासक या भक्त पर इनकी कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी चुटकी में संभव हो जाते हैं। हिमाचल के नंदापर्वत पर इनका प्रसिद्ध तीर्थ है।

अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां होती हैं। इसलिए इस देवी की सच्चे मन से विधि विधान से उपासना-आराधना करने से ये सभी सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।

भगवान शिव ने भी इस देवी की कृपा से ये तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं। इस देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। इस देवी के दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प है। इसलिए इन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है।

इनका वाहन सिंह है और ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। विधि-विधान से नौंवे दिन इस देवी की उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ये अंतिम देवी हैं। इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।

मां के चरणों में शरणागत होकर निरंतर उपासना करने से, इस देवी का स्मरण, ध्यान, पूजन करने से हम अमृत पद की ओर चले जाते हैं।

भगवती सिद्धिदात्री का ध्यान, स्रोत कवच का पाठ करने से निर्वाण चक्र जागृत होता है, जिससे सिद्धि-ऋद्धि की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के नौवें दिन सिद्धदात्री की पूजा-पाठ करने से आपके कार्यों में आ रहे सारे व्यवधान समाप्त हो जाते हैं सारे मनोकामना की पूरी करती हैं।



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