……. तो इसलिए प्रसिद्ध है हिंडाल्को रेणुकूट की रामलीला

मनोज वर्मा (संवाददाता)

रेनुकूट । नवरात्र के पावन महीने में जहां सारे देश में रामलीला का मंचन होता है वही एक शहर ऐसा भी है जहां की लीला अपने आप में एक खास मायने रखता है जी हां हम बात कर रहे हैं सोनभद्र के रेणुकूट जहां की लीला देखने के बाद आपको बार-बार वहां की लीला देखने का मन करेगा श्री रामलीला परिषद हिंडालको द्वारा आयोजित 55 वें संपूर्ण रामायण का मंचन हो रहा है। रेणुकूट के रामलीला मैदान में इन दिनों चल रहे लीला को देखने के लिए दूर दराज से

सैकड़ों की संख्या में लोग आ रहे हैं रेणुकूट में चल रहे इस लीला को दिखाने के लिए कोई बाहर से कलाकारों को नहीं बुलाया जाता बल्कि रेणुकूट में रह रहे नागरिकों के बच्चों एवं नागरिक सहित कुल 350 कलाकारों द्वारा आयोजित किया जाता है श्री रामलीला परिषद द्वारा सजाया गया मंच देखते बन रहा है। एक साथ 9 स्टेज को इतने आकर्षित ढंग से सजाया गया है कि लीला की शोभा देखते बन रही है। 9 दिनों तक चलने वाली इस लीला में रामलीला

परिषद के निदेशक सुनील परवाल ने लीला को आकर्षक बनाने के लिए ब्रैक ग्राउंड म्यूजिक तैयार किया है जिस पर कुल 350 कलाकार भगवान की लीलाओं का मंचन कर रहे हैं। वहीं इनके मेकअप और इनके ड्रेस का काम खुद कलाकार ही करते हैं। रामलीला परिषद के अध्यक्ष बीएन झा ने कहा कि लगभग 55 साल से लगातार रामलीला का मंचन सफलतापूर्वक कराया जा रहा है आगे बताया कि हिंडाल्को की रामलीला पूरे पूर्वांचल या उत्तर प्रदेश में

शायद ही कहीं देखने को मिल सकता है साथ ही साथ उन्होंने कहा कि दशमी के दिन जलने वाली 95 फ़ीट रावण के पुतले को भी हमारे यहां के कलाकारों द्वारा ही तैयार किया जा रहा है जिसके लिए हम रामलीला परिषद को धन्यवाद देते हैं और रामलीला परिषद के सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हैं। वही रामलीला के वरिष्ठ कलाकार तनवीर अहमद ने बताया कि इस लीला में सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें हिंदू

मुस्लिम सिख ईसाई सभी धर्म के लोग बड़े ही लगन से भगवान की लीला करते हैं यह गंगा जमुनी तहजीब को अब तक भारतीय संस्कृति से संजोए हुए है।



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