Wednesday, November 13, 2019 - 08:19 AM
धर्म-कर्म

शारदीय नवरात्र सप्तमी को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की होती हैं आराधना

20

नवरात्र में सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। मां कालरात्रि की उत्पत्ति धर्म की रक्षा एवं पापियों के नाश के लिए हुई। रक्तबीज का वध करने के लिए मां दुर्गा ने इन्हें अपने तेज से उत्पन्न किया। मां कालरात्रि सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं। इसी कारण इनका नाम शुभंकरी है।

काल का नाश करने वाली होने के कारण मां को कालरात्रि कहा जाता है। मां की उपासना से भक्त हर भय से मुक्त हो जाते हैं। मां की पूजा के साथ भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा की उपासना अवश्य करनी चाहिए। मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं। मां की उपासना से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। रोग विकार दूर हो जाते हैं। मां कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं। मां को गुड़ का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां कालरात्रि को लाल रंग प्रिय है। मां की पूजा के लिए मध्य रात्रि का समय शुभ माना जाता है। मां अपने भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करती हैं। मां के भक्तों पर किसी प्रकार का संकट नहीं आता।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...