प्रभु श्री राम के धनुष तोड़ते ही शिया ने डाला गले में जयमाल

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)
– महुली में चल रहे श्री रामलीला का छठवां दिन

विंढमगंज । स्थानीय थाना क्षेत्र के महुली में राजा बरियार शाह खेल मैदान में चल रहे श्री रामलीला के छठें दिन धनुषयज्ञ तथा श्री राम के विवाह के लीला का मंचन किया गया। आरबीएस रामलीला मैदान पर मंचन के छठें दिन परिषद के कलाकारों ने बिभिन्न चरित्रों का जीवंत अभिनय कर आगन्तुक दर्शकों मन मोह लिया।
मंगलवार की रात्रि में रामलीला मैदान पर सीता द्वारा गौरी पूजन, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद एवं राम-सीता विवाह का मंचन हुआ। स्वयंबर में धनुष टुटा देख परशुराम के क्रोध का ज्वाला भड़क उठता है।लक्ष्मण के बातों को सुनकर परशुराम की क्रोध और बढ़ने लगती है,वहीँ प्रभु श्रीराम के मृदुल भाव व बचन सुनकर उनकी ज्वाला कम होती है।पुनः जब परशुराम को ज्ञात होता है कि श्री राम ही नारायण हैं तब उनके विजयी होने की कामना करते हैं।
छठें दिन मंचन के क्रम में राजा जनक के स्वयंबर के शर्त के अनुसार अनेक दूर-दूर से आये राजागण जब धनुष को तोड़ने की बात दूर उसे उठाने में अपनी असमर्थतता दिखाते हैं तब राजा जनक कहते हैं कि मुझे ऐसा आभास हो रहा है कि कोई इस पृथ्वी पर बलशाली नही है,यह पूरी धरा बीरों से खाली है।मैंने यह स्वयंबर रचकर अपनी जग हँसाई करायी है।यह बचन सुनते ही मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम धनुष की चाप चढ़ाकर उसका खण्डन करते हैं।वहीं दुसरी तरफ महाराज जनक अयोध्या में दूत भेजकर बारात सहित पहुचने का संदेशा भेजवाते हैं।
राजा जनक के निमंत्रण पर राजा दशरथ अपने सभी पुत्रों व बारातियों के साथ बारात लेकर पहुँचते हैं ।इसके बाद विवाह के लीला का मंचन किया गया। इसअवसर पर कमेटी के अध्यक्ष कामता प्रसाद,बीरेंद्र कनौजिया,दिलीप कन्नौ सहित अंय पदाधिकारी मौजूद रहे।दर्शकों की भीड़ देखने लायक थी।



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